लैंडस्लाइड प्रभावित वायनाड को कर्नाटक सरकार ने दिए 10 करोड़, प्रियंका गांधी के संसदीय क्षेत्र को लेकर प्रदेश की राजनीति में आया भूचाल

केरल के वायनाड में भूस्खलन से प्रभावित 100 परिवारों की मदद के लिए कर्नाटक सरकार द्वारा 10 करोड़ रुपये की राहत राशि जारी करने का फैसला अब राजनीतिक विवाद में बदल गया है. कांग्रेस ने इसे मानवीय जिम्मेदारी बताया, जबकि भाजपा और जेडीएस ने सरकार पर कर्नाटक के किसानों और कर्मचारियों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है.

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Kuldeep Sharma

कर्नाटक सरकार का वायनाड के लिए 10 करोड़ रुपये की सहायता राशि देने का निर्णय विधानसभा में पेश किए गए अनुपूरक बजट का हिस्सा है. यह इलाका कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी का संसदीय क्षेत्र भी है, जिस वजह से इस फैसले ने और भी ज्यादा राजनीतिक तूल पकड़ लिया है. जहां भाजपा और जेडीएस इसे राज्य के हितों से खिलवाड़ बता रहे हैं, वहीं कांग्रेस का कहना है कि मुश्किल की घड़ी में पड़ोसी राज्यों की मदद करना मानवीय कर्तव्य है.

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी वाय विजयेंद्र ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राज्य के किसान लगातार बारिश और फसल नुकसान से जूझ रहे हैं, लेकिन सरकार ने अब तक उनकी सुध नहीं ली. उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री और उनके मंत्री खेतों का जायजा तक लेने नहीं पहुंचे, जबकि पड़ोसी राज्य को 10 करोड़ रुपये की राहत भेज दी गई. भाजपा नेता सी एन अश्वथ नारायण ने भी इसे करदाताओं के पैसे की बर्बादी बताया और कहा कि यह कांग्रेस सरकार की आदत बन चुकी है.

'मानवता की मदद राजनीति से ऊपर'

वहीं कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों का जोरदार जवाब देते हुए कहा कि आपदा के समय मदद करना संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी है. बेंगलुरु सेंट्रल से कांग्रेस विधायक रिजवान अरशद ने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेशों में राहत भेज सकते हैं, तो कर्नाटक सरकार अपने पड़ोसी राज्य को क्यों नहीं मदद कर सकती. उद्योग मंत्री एम बी पाटिल ने भाजपा को घेरते हुए कहा कि जब बसवराज बोम्मई मुख्यमंत्री थे, तब भाजपा विधायकों को ज्यादा फंड और कांग्रेस विधायकों को कम फंड दिया गया. अब भाजपा बराबरी की बात कर रही है, जो पूरी तरह दोहरा रवैया है.

'किसानों और कर्मचारियों से धोखा'

जेडीएस ने कांग्रेस पर वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए कहा कि कर्नाटक में सरकारी कर्मचारियों को तीन महीने से वेतन नहीं मिला है, लेकिन सरकार केरल को राहत दे रही है. पार्टी ने दावा किया कि राज्य में किसान यूरिया की कमी से जूझ रहे हैं, जबकि खाद्य सामग्री की तस्करी केरल तक हो रही है. जेडीएस ने कांग्रेस सरकार को 'कर्नाटक के लिए अभिशाप और केरल के लिए वरदान' करार दिया.

'राज्य की प्राथमिकताएं सवालों के घेरे में'

कर्नाटक सरकार का यह कदम न सिर्फ विपक्ष के निशाने पर है, बल्कि आम जनता के बीच भी यह सवाल खड़ा कर रहा है कि जब राज्य खुद वित्तीय संकट से जूझ रहा है तो पड़ोसी राज्य को मदद देना कितना उचित है. हालांकि कांग्रेस का तर्क है कि देश एक परिवार है और आपदा की घड़ी में राजनीति से ऊपर उठकर साथ खड़ा होना ही सच्ची सेवा है.