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India Daily

'अपने काम से मतलब रखो', कमल हासन ने ट्रंप पर किया पलटवार, रूसी तेल खरीदने पर भारत को छूट देने वाले बयान पर भड़के

रूसी तेल खरीदने पर अमेरिकी टिप्पणी के बाद कमल हासन ने कड़ा जवाब दिया. उन्होंने कहा कि भारत एक स्वतंत्र देश है और किसी विदेशी शक्ति के आदेश नहीं मानता. उन्होंने आपसी सम्मान को वैश्विक शांति का आधार बताया.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
'अपने काम से मतलब रखो', कमल हासन ने ट्रंप पर किया पलटवार, रूसी तेल खरीदने पर भारत को छूट देने वाले बयान पर भड़के
Courtesy: ANI

रूस से तेल खरीदने को लेकर अमेरिका की टिप्पणी ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है. अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के उस बयान के बाद, जिसमें उन्होंने कहा कि अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने की 'इजाजत' दी है, भारत में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं. अभिनेता और राजनेता कमल हासन ने इस बयान पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि भारत एक संप्रभु देश है और किसी बाहरी ताकत से आदेश नहीं लेता. उनके इस बयान ने विदेश नीति पर नई बहस छेड़ दी है.

कमल हासन का तीखा जवाब

राज्यसभा सांसद और मक्कल नीधि मय्यम के प्रमुख कमल हासन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अमेरिकी राष्ट्रपति को संबोधित करते हुए लिखा कि भारत एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है. उन्होंने कहा कि भारतीय लोग किसी दूर बैठे देश से निर्देश नहीं लेते. हासन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका को अपने मामलों पर ध्यान देना चाहिए. साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि देशों के बीच आपसी सम्मान ही स्थायी शांति का आधार बन सकता है.

अमेरिकी बयान से बढ़ा विवाद

यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने एक इंटरव्यू में कहा कि वैश्विक आपूर्ति संकट के कारण अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने की अनुमति दी है. उन्होंने दावा किया कि पहले अमेरिका ने भारत से प्रतिबंधित रूसी तेल खरीद बंद करने को कहा था और भारत ने उस पर अमल भी किया था. हालांकि मौजूदा हालात में अस्थायी राहत देने के लिए यह छूट दी गई.

भारत सरकार का स्पष्ट रुख

भारत सरकार ने इस पूरे मामले पर साफ किया कि देश की ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है. सरकार के अनुसार भारत ने तेल आयात के स्रोतों को बढ़ाकर 27 से 40 देशों तक कर लिया है. इससे किसी एक क्षेत्र या देश पर निर्भरता कम हुई है. अधिकारियों का कहना है कि भारत राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए वहीं से तेल खरीदता है जहां से उसे सबसे किफायती दरें मिलती हैं.

विपक्ष की प्रतिक्रिया भी सामने आई

इस मुद्दे पर विपक्ष ने भी सरकार को घेरने की कोशिश की है. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि भारत की विदेश नीति जनता की सामूहिक इच्छा से तय होती है. उनके अनुसार नीति देश के इतिहास, भूगोल और मूल्यों पर आधारित होनी चाहिए. उन्होंने मौजूदा हालात पर सवाल उठाते हुए कहा कि विदेश नीति को मजबूत और स्वतंत्र बनाए रखना जरूरी है.