जयपुर: जेईई मेन 2026 (सेशन 1) के परिणाम घोषित होने के बाद देश भर से मेधावी छात्रों की प्रेरक कहानियां सामने आ रही हैं. लेकिन इनमें सबसे अनोखी और हैरान कर देने वाली कहानी ओडिशा के भुवनेश्वर के रहने वाले दो जुड़वां भाइयों, महरुर और मशरूफ की है. इन दोनों भाइयों ने न केवल एक साथ पढ़ाई की, बल्कि परीक्षा में उनके अंक और परसेंटाइल भी बिल्कुल एक जैसे आए हैं, जिसे देखकर शिक्षक और साथी छात्र दंग हैं.
महरुर और मशरूफ पिछले तीन वर्षों से राजस्थान के शिक्षा के गढ़ 'कोटा' में रहकर इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहे थे. बचपन से ही दोनों की आदतें और पढ़ने का तरीका एक समान था. उन्होंने न केवल एक ही किताबों से पढ़ाई की, बल्कि एक-दूसरे के लिए सबसे बड़े 'मोटिवेटर' भी बने. परिणाम आया तो दोनों के खाते में 300 में से 285 अंक दर्ज थे और दोनों ने ही 99.99 परसेंटाइल हासिल किया. अब इन भाइयों की अगली मंजिल देश का प्रतिष्ठित संस्थान 'IIT बॉम्बे' है, जहां वे एक साथ दाखिला लेना चाहते हैं.
#WATCH | Kota, Rajasthan: Twin Brothers Mahroof and Masroor Ahmed Khan from Bhubaneswar have got the same score in several exams, including the JEE-Main 2026 Session 1 examination.
Masroor Ahmed Khan says, "I have been in Kota since class 10 and have been following coaching… pic.twitter.com/mfmxw9LOGP— ANI (@ANI) February 17, 2026Also Read
इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे उनकी मां का वह बलिदान है, जिसकी चर्चा आज हर जुबान पर है. जब दोनों भाइयों ने इंजीनियरिंग को अपना लक्ष्य चुना, तब उनकी मां ने एक बड़ा फैसला लिया. वह पेशे से डॉक्टर थीं और सरकारी नौकरी में थीं, लेकिन उन्होंने अपने बच्चों को कोटा में अकेला नहीं छोड़ने का निर्णय लिया. बेटों की पढ़ाई के दौरान उन्हें भावनात्मक संबल देने के लिए उन्होंने अपना करियर और सरकारी नौकरी तक दांव पर लगा दी. उन्होंने अपनी डॉक्टरी छोड़ दी और तीन साल तक साये की तरह बच्चों के साथ रहकर उनकी तैयारी में मदद की.
7 मई 2008 को जन्मे महरुर और मशरूफ ने अपनी स्कूली शिक्षा भी एक साथ पूरी की है. 10वीं कक्षा में भी दोनों का प्रदर्शन शानदार था; महरूफ ने 95.2% और मसरूर ने 97.2% अंक हासिल किए थे. न्यूज़ एजेंसी ANI से बात करते हुए मसरूर ने कहा, 'मैं 10वीं के बाद से ही कोटा में हूं और पिछले 3 साल से एक ही शिक्षक के मार्गदर्शन में पढ़ाई कर रहा हूं. हम दोनों का पढ़ाई का समय एक ही था और हमने एक-दूसरे से बहुत कुछ सीखा है.'
कोटा के कोचिंग संस्थानों में इन भाइयों की सफलता को एक 'दुर्लभ संयोग' और कड़ी मेहनत का प्रतिफल माना जा रहा है. परिवार के लिए यह दोहरी खुशी का मौका है, जो अब इन जुड़वां इंजीनियरों को आईआईटी के गलियारों में देखने का सपना बुन रहा है.