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Kishtwar Cloudburst: किश्तवाड़ में बादल फटने से 46 लोगों की मौत, जम्मू-कश्मीर के चोसिटी में आई भीषण बाढ़, अब तक क्या-क्या हुए जानें 

गांव के कई हिस्से कीचड़ और मलबे में दब गए हैं. ढांचे की सुरक्षा जांच और सड़क मरम्मत का काम जारी है, जबकि जीवित बचे लोगों की तलाश रात तक जारी है.

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Edited By: Reepu Kumari
Kishtwar Cloudburst: किश्तवाड़ में बादल फटने से 46 लोगों की मौत, जम्मू-कश्मीर के चोसिटी में आई भीषण बाढ़, अब तक क्या-क्या हुए जानें 
Courtesy: Pinterest

Kishtwar Cloudburst: जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के चोसिटी गांव में गुरुवार (14 अगस्त) दोपहर 12 बजे से 1 बजे के बीच भीषण बादल फटने से अचानक बाढ़ आ गई और पूजनीय मचैल माता मंदिर जाने वाले रास्ते का आखिरी मोटर-योग्य स्थान भी बह गया. इस बाढ़ में दो केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) कर्मियों सहित कम से कम 46 लोगों की मौत हो गई है, जबकि अब तक 160 से ज्यादा लोगों को बचाया जा चुका है.

25 जुलाई से शुरू हुई और 5 सितंबर को समाप्त होने वाली वार्षिक मचैल माता यात्रा के लिए बड़ी संख्या में तीर्थयात्री एकत्रित हुए थे. पानी और मलबे के अचानक बढ़ने से संपत्ति नष्ट हो गई, सड़क संपर्क टूट गया और दर्जनों लोग मलबे में फँस गए.

बचाव अभियान जोरों पर

अधिकारियों ने बताया कि 167 लोगों को बचा लिया गया है, जिनमें से 38 की हालत गंभीर है. दिन भर मृतकों की संख्या बढ़ती रही और अधिकारियों को आशंका है कि यह संख्या और बढ़ सकती है क्योंकि कई लोग अभी भी लापता हैं. सेना की व्हाइट नाइट कोर, पुलिस, एसडीआरएफ और नागरिक स्वयंसेवकों के साथ घटनास्थल पर मौजूद हैं. 300 सैनिकों और चिकित्सा टुकड़ियों वाली पांच से ज़्यादा सैन्य टुकड़ियाँ राहत सामग्री, बचाव उपकरण और चिकित्सा उपकरण लेकर तैनात की गई हैं. ज़रूरत पड़ने पर निकासी के लिए वायु सेना को भी अलर्ट पर रखा गया है.

केंद्रीय और राज्य के नेताओं ने सहायता का आश्वासन दिया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शोक व्यक्त किया और पूर्ण केन्द्रीय सहायता का आश्वासन देते हुए कहा कि प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी.

 

 

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से बात की और एनडीआरएफ की टीमों को तुरंत वहाँ पहुँचने का निर्देश दिया. उधमपुर से लगभग 180 कर्मियों वाली एनडीआरएफ की दो इकाइयाँ, उन्नत खोज और बचाव उपकरणों से लैस, अभियान में शामिल हो गई हैं. उपराज्यपाल कार्यालय ने पुष्टि की है कि सभी एजेंसियाँ ज़मीनी स्तर पर समन्वय के साथ काम कर रही हैं.

जमीनी स्थिति 'गंभीर'

पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अचानक आई बाढ़ से हुए व्यापक नुकसान का हवाला देते हुए स्थिति को 'गंभीर' बताया. स्थानीय प्रशासन की टीमें निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचा रही हैं, घायलों की देखभाल कर रही हैं और फंसे हुए परिवारों को आवश्यक राहत सामग्री पहुँचा रही हैं.

अधिकारियों का कहना है कि खड़ी ढलान और भारी बारिश के कारण पानी का स्तर और बढ़ गया है.

गाँव के कई हिस्से कीचड़ और मलबे में दब गए हैं. ढांचे की सुरक्षा जाँच और सड़क मरम्मत का काम जारी है, जबकि जीवित बचे लोगों की तलाश रात तक जारी है.