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मालदीव से तनावपूर्ण संबंध, लाल सागर में वॉरशिप की तैनाती समेत कई मुद्दों पर क्या बोले जयशंकर?

जयशंकर ने अपने पड़ोसियों की मदद करने के भारत के ट्रैक रिकॉर्ड के बारे में बात करते हुए श्रीलंका का उदाहरण दिया. उन्होंने बताया कि भारत की ओर से श्रीलंका को कई मिलियन डॉलर की सहायता उस दौरान प्रदान की गई थी, जब श्रीलंका गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा था.

Om Pratap

Jaishankar spoke on China Maldives Red Sea crisis: विदेश मंत्री जयशंकर ने मालदीव के साथ भारत के तनावपूर्ण संबंधों, लाल सागर में युद्धपोतों की तैनाती और इजराइल-हमास युद्ध जैसे कई विषयों पर अपनी राय दी. उन्होंने मंगलवार को कहा कि ये बिलकुल संभव है कि चीन, भारत के पड़ोसी देशों को प्रभावित करेगा, लेकिन भारत को ऐसी प्रतिस्पर्धी राजनीति का डटकर सामना करना चाहिए. विदेश मंत्री ने लाल सागर में संकट से जूझ रहे लोगों की मदद वाली इंडियन नेवी की भूमिका पर भी बातचीत की.

इंडियन मैनेजमेंट इस्टिट्यूट (IIM) मुंबई में छात्रों के साथ बातचीत के दौरान जयशंकर ने कई मुद्दों पर पूछे गए सवालों के जवाब दिए. विदेश मंत्री से चीन से लेकर मालदीव के साथ भारत के तनावपूर्ण संबंधों, लाल सागर क्षेत्र में नौसेना के युद्धपोतों की तैनाती और इजराइल-हमास युद्ध के मुद्दे से जुड़े सवाल पूछे गए. 

सोशल मीडिया 'एक्स' पर एक पोस्ट में जयशंकर ने लिखा- आज IIM मुंबई में 'भारत क्यों मायने रखता है' टॉपिक पर बात की. उन्होंने लिखा कि मुझसे कुछ सवाल पूछे गए, जिसका संक्षेप में मतलब था कि भारत क्यों मायने रखता है. उन्होंने पोस्ट में  कुछ सवालों का जिक्र भी किया, जैसे- पीएम मोदी का विदेश मंत्री होना कैसा है? मैंने अपनी नवीनतम पुस्तक क्यों लिखी? आधुनिक चुनौतियों के लिए रामायण की प्रासंगिकता क्या है? दुनिया में हमारे युवाओं के लिए क्या अवसर और चुनौतियां हैं? भारतीय परिवर्तन वैश्विक सोच को कैसे प्रभावित कर रहा है?

मालदीव के साथ भारत के तनावपूर्ण संबंधों पर क्या बोले जयशंकर?

जवाब देते हुए जयशंकर ने कहा कि हर पड़ोस में समस्याएं हैं, लेकिन अंततः पड़ोसियों को एक-दूसरे की जरूरत है. इसके अलावा, जयशंकर ने भारत-चीन संबंधों से जुड़े सवालों के जवाब दिए. IFS अधिकारी के रूप में दशकों लंबे करियर के दौरान बीजिंग में राजदूत के रूप में कार्य करने वाले जयशंकर ने कहा कि कुछ क्षेत्र में बढ़ते चीनी प्रभाव को लेकर प्रतिस्पर्धा है, लेकिन इसे भारतीय कूटनीति की विफलता कहना गलत होगा. 

उन्होंने कहा कि हमें समझना चाहिए, चीन भी एक पड़ोसी देश है और कई मायनों में, जैसे- प्रतिस्पर्धी राजनीति के हिस्से के रूप में वो पड़ोसी देशों को प्रभावित भी करेगा. मुझे नहीं लगता कि हमें चीन से डरना चाहिए. मुझे लगता है कि हमें कहना चाहिए 'ठीक है, वैश्विक राजनीति एक प्रतिस्पर्धी खेल है. आप अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें, मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करूंगा.

जयशंकर ने कहा कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के नाते चीन चीजों को अपने तरीके से आकार देने की कोशिश करेगा. उन्होंने कहा कि इसका जवाब यह शिकायत करना नहीं है कि चीन ऐसा कर रहा है. मैं आज कहूंगा कि हमें प्रतिस्पर्धा से नहीं डरना चाहिए. हमें प्रतिस्पर्धा का स्वागत करना चाहिए और कहना चाहिए कि मेरे पास प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता है.

जयशंकर ने श्रीलंका का दिया उदाहरण

जयशंकर ने अपने पड़ोसियों की मदद करने के भारत के ट्रैक रिकॉर्ड के बारे में बात करते हुए श्रीलंका का उदाहरण दिया. उन्होंने बताया कि भारत की ओर से श्रीलंका को कई मिलियन डॉलर की सहायता उस दौरान प्रदान की गई थी, जब श्रीलंका गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा था.

लाल सागर मामले पर भी दिए सवालों के जवाब

लाल सागर क्षेत्र में मालवाहक जहाजों पर ड्रोन हमलों के बाद भारत की प्रतिक्रिया पर उन्होंने कहा कि अगर भारत के पड़ोस में बुरी चीजें हो रही हैं और आप कहेंगे कि मेरा इससे कोई लेना देना नहीं है, तो ऐसा नहीं है कि भारत को एक जिम्मेदार देश माना जाएगा. बल्कि जब आप परेशानी में होंगे तो आपका पड़ोसी देश भी जवाब देगा कि हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं है. जयशंकर ने कहा कि भारत की क्षमता, उसकी अपनी रुचि और प्रतिष्ठा आज इस बात की गारंटी देती है कि वह कठिन परिस्थितियों में लोगों की मदद करे. उन्होंने बताया कि भारतीय नौसेना ने क्षेत्र में लाल सागर में 10 जहाज तैनात किए हैं. 

इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष पर क्या बोले जयशंकर?

पश्चिम एशिया में जारी एक और संकट पर बात करते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत दशकों से चले आ रहे इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष को समाप्त करने के लिए दो देश वाले समाधान का पक्षधर है. उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से भारत और बहुत से देशों का मानना ​​है कि समस्या को केवल दो देश समाधान के माध्यम से ही सुलझाया जा सकता है. 

उन्होंने कहा कि 7 अक्टूबर 2023 को जो हुआ, वो एक आतंकवादी हमला था. हमलों में करीब 1200 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर आम नागरिक थे. इसके अलावा, लगभग 250 इजरायलियों और अन्य नागरिकों को हमास ने बंधक बना लिया. उन्होंने कहा कि हमने आतंकवाद के एक और पीड़ित इजरायल के साथ एकजुटता व्यक्त की है.