कीव में विदेश मंत्री एस जयशंकर और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के बीच रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर अहम बातचीत हुई. इस दौरान रूसी तेल की खरीद का मुद्दा भी उठा. जयशंकर ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को नजरअंदाज नहीं कर सकता, लेकिन युद्ध खत्म करने के लिए कूटनीतिक रास्ता जरूरी है.
जयशंकर ने यूक्रेन की चिंता को स्वीकार करते हुए कहा कि भारत की स्थिति को भी समझना जरूरी है. 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना आसान नहीं है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक ऊर्जा बाजार लगातार दबाव में है. उन्होंने स्पष्ट किया कि तेल, खनिज, धातु या उर्वरक खरीदने अथवा न खरीदने से रूस-यूक्रेन संघर्ष का अंत नहीं होगा. भारत के लिए सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है.
विदेश मंत्री ने कहा कि यह संघर्ष अपने पांचवें वर्ष में पहुंच चुका है और अब इसका समाधान युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति के जरिए तलाशना होगा. भारत लगातार कहता रहा है कि मौजूदा दौर युद्ध का नहीं है. जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया रूस यात्रा के दौरान दिए संदेश का भी उल्लेख किया, जिसमें लंबे समय से जारी लड़ाई को समाप्त करने की जरूरत पर जोर दिया गया था.
कीव यात्रा के दौरान जयशंकर ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा से मुलाकात की. दोनों पक्षों के बीच युद्ध खत्म करने के संभावित रास्तों और भारत-यूक्रेन संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा हुई. जयशंकर ने जेलेंस्की को विदेश मंत्री के साथ हुई बातचीत और दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं की जानकारी दी. भारत ने इस दौरान अपना स्वतंत्र कूटनीतिक रुख कायम रखा.
जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन युद्ध समाप्त करने की भारत की प्रतिबद्धता की सराहना करता है. उन्होंने दोहराया कि यह समय युद्ध का नहीं, शांति का होना चाहिए. जेलेंस्की ने यह भी दावा किया कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल की कीव यात्रा के दौरान रूस की ओर से जेट संचालित शहीद ड्रोन इस्तेमाल किए गए, जिन्हें यूक्रेनी लड़ाकू विमानों ने रोक लिया. भारत ने लगातार रूस और यूक्रेन दोनों के साथ संबंध बनाए रखते हुए बातचीत और कूटनीति के जरिए संघर्ष खत्म करने की वकालत की है.