विवादास्पद विदेश अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 की समीक्षा के लिए संसद के दोनों सदनों की 31 सदस्यीय संयुक्त समिति का गठन किया गया है. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा गठित इस समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल हैं. भाजपा सांसद संजय जायसवाल को समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. समिति में भाजपा के 14 और कांग्रेस के 5 सदस्यों के अलावा टीएमसी, डीएमके, सपा, जेडीयू और टीडीपी जैसी अन्य पार्टियों के प्रतिनिधि भी शामिल हैं.
संसदीय समिति को शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है. 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किए गए इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और विदेशी फंडिंग पर सरकारी निगरानी को सख्त बनाना है. इसके तहत यदि किसी संगठन का एफसीआरए (FCRA) लाइसेंस रद्द होता है, तो उसकी संपत्तियों के प्रबंधन और निपटान के लिए एक नामित प्राधिकरण बनाने का प्रावधान है.
विपक्ष के भारी विरोध के बाद 12 अगस्त को यह विधेयक संयुक्त समिति को भेजा गया था. विपक्ष और पूर्वोत्तर राज्यों (नागालैंड, मिजोरम और मेघालय) के मुख्यमंत्रियों ने आशंका जताई थी कि यह कानून अल्पसंख्यकों और ईसाई सामाजिक संस्थाओं को प्रभावित कर सकता है. वहीं, सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि यह कानून किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि केवल विदेशी योगदान को पारदर्शी और नियमित करने के लिए लाया गया है.