साल की शुरूआत में ही ISRO ने रचा इतिहास, PSLV-C62 को सफलता पूर्वक किया लॉन्च

ISRO ने PSLV-C62 मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च किया. तीसरे स्टेज HPS3 की सफलता ने 2025 की विफलता को पीछे छोड़ दिया. मिशन में EOS-N1 और अंतरराष्ट्रीय पेलोड के साथ AayulSAT भी सफलतापूर्वक ऑर्बिट में पहुंचा.

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Kuldeep Sharma

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने PSLV-C62 लॉन्च कर 2026 का पहला महत्वपूर्ण अंतरिक्ष मिशन सफलतापूर्वक पूरा किया. विशेष ध्यान तीसरे स्टेज HPS3 पर था, जिसने 2025 में मिशन को बाधित किया था. इस बार यह स्टेज ‘textbook’ गति पर सही समय पर अलग हो गया और चौथे स्टेज को पेलोड सौंपा. मिशन में DRDO का EOS-N1, OrbitAID का AayulSAT और ब्राजील का Orbital Temple सैटेलाइट शामिल हैं.

तीसरे स्टेज HPS3 की सफलता

तीसरे स्टेज HPS3 ने पूरी तरह से बर्न पूरा किया और सफलतापूर्वक अलग हो गया. 5,688 मीटर प्रति सेकंड की गति पर यह स्टेज चौथे स्टेज को पेलोड सौंपने में सफल रहा. 2025 में इसी स्टेज की वजह से PSLV मिशन विफल हुआ था, लेकिन इस बार तकनीकी सुधार और कड़े गुणवत्ता परीक्षणों के चलते कोई दिक्कत नहीं आई. मिशन कंट्रोल टीम ने इसे एक महत्वपूर्ण सफलता माना.

EOS-N1 और अन्य पेलोड

इस मिशन का प्रमुख पेलोड DRDO द्वारा विकसित EOS-N1 सैटेलाइट है, जो उच्च गुणवत्ता वाली रणनीतिक इमेजिंग के लिए काम करेगा. इसके अलावा 15 अंतरराष्ट्रीय पेलोड भी लॉन्च हुए, जिनमें ब्राजील का Orbital Temple शामिल है. Orbital Temple नामों को स्मृति में रखता है और ऑर्बिट से संदेश प्रसारित करता रहेगा.

भारतीय स्टार्टअप AayulSAT

इस PSLV मिशन में भारतीय स्टार्टअप OrbitAID का 25 किलोग्राम वजनी AayulSAT शामिल है. यह सैटेलाइट माइक्रोग्रैविटी में स्पेस रिफ्यूलिंग तकनीक के व्यवहार को परखने के लिए तैयार किया गया है. इसका उद्देश्य भविष्य में स्थायी और रिफ्यूल योग्य सैटेलाइट कंस्ट्रक्शन के लिए भारत की क्षमता दिखाना है.

लॉन्च प्रक्रिया और तकनीकी नियंत्रण

PSLV-C62 का ऑटोमैटिक लॉन्च नियंत्रण कंप्यूटर पूरी प्रक्रिया संभाल रहा था. विकास इंजन वाले दूसरे स्टेज ने भी बर्न पूरी तरह से सफलतापूर्वक पूरा किया. 116 किलोमीटर की ऊंचाई पर हीट शील्ड अलग किया गया और पेलोड्स खुले अंतरिक्ष में पहुंच गए. मौसम अनुकूल रहा, जिससे लॉन्च प्रक्रिया में कोई रुकावट नहीं आई.

2025 की सफलताओं के बाद आत्मविश्वास

PSLV-C62 मिशन 2025 के अंत में मिले LVM3-M6 और अन्य सफलताओं के बाद ISRO के आत्मविश्वास को बढ़ाता है. इससे पहले चंद्रयान-2, चंद्रयान-3 और वनवेब मिशनों ने LVM3 और PSLV की विश्वसनीयता साबित की थी. अब PSLV-C62 ने बहु-पेलोड मिशन की सफलता दिखाते हुए भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को मजबूत शुरुआत दी है.