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भारत के खिलाफ ISI की साजिश का बड़ा खुलासा! आतंकियों को कश्मीर की राजनीतिक पार्टियों में घुसने का दिया फरमान

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों ने खुलासा किया है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI ने अपने मददगारों को सुरक्षा बलों से बचाने के लिए मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों में शामिल होने और पुराने उग्रवादी संगठनों को सक्रिय करने की सलाह दी है.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
भारत के खिलाफ ISI की साजिश का बड़ा खुलासा! आतंकियों को कश्मीर की राजनीतिक पार्टियों में घुसने का दिया फरमान
Courtesy: ai generated

कश्मीर घाटी की शांत वादियों के पीछे सुरक्षा और सियासत का एक ऐसा खेल चल रहा है जो सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है. सुरक्षाबलों की मुस्तैदी से बचने के लिए अब सरहद पार से चालबाजी का बिल्कुल नया पैंतरा आजमाया जा रहा है. जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है. खुफिया रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI ने कश्मीर में सक्रिय अपने मददगारों यानी ओवर ग्राउंड वर्कर्स और संदिग्धों को एक अनोखी सलाह दी है. उसने कहा है कि सुरक्षाबलों की कड़ी नजर और जांच-पड़ताल से बचने के लिए ये लोग मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों में शामिल हो जाएं.

नये फरमान में छिपी है खौफनाक चाल

जांचकर्ताओं का मानना है कि इस कदम के पीछे चाल यह है कि इन संदिग्धों को समाज में एक कानूनी और सम्मानित पहचान मिल सके जिससे सुरक्षा बल आसानी से उन पर शक न करें. आपको बता दें कि इन मददगारों पर आतंकवादी संगठनों को सामान पहुंचाना नए लड़कों की भर्ती करना, बातचीत के साधन मुहैया कराना और पैसों का इंतजाम करने जैसे गंभीर आरोप लगते रहे हैं.

यह पूरी बात श्रीनगर पुलिस द्वारा पकड़े गए कुछ OGWs से पूछताछ के दौरान सामने आई है. अधिकारियों का दावा है कि पकड़े गए कुछ संदिग्धों के तार पहले से ही राष्ट्रीय राजनीतिक दलों से जुड़े हुए थे. सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि वे अपनी संदिग्ध हरकतों को छिपाने और कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए राजनीतिक पार्टी के मेंबरशिप कार्ड को एक ढाल की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं.

उग्रवादी संगठनों को फिर से जिंदा करने की कोशिश

बात सिर्फ राजनीति में घुसपैठ तक ही सीमित नहीं है. अधिकारियों के मुताबिक ISI 1990 के दशक के उन उग्रवादी संगठनों को भी फिर से जिंदा करने की कोशिश में है जो सालों से ठंडे पड़े थे. ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि दुनिया के सामने यह दिखाया जा सके कि कश्मीर में आतंकवाद कोई सीमा पार से प्रायोजित खेल नहीं बल्कि वहां का स्थानीय आंदोलन है.

जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान पर 'फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स' जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का भारी दबाव है. टेरर फंडिंग के मामले में फंसने से बचने के लिए वह अब सीधे सामने आने के बजाय इन गुप्त रास्तों का इस्तेमाल कर रहा है. हालांकि अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि किसी भी पार्टी का सदस्य होने से किसी को गुनाह की माफी नहीं मिलेगी और हर मामले की जांच केवल सबूतों के आधार पर ही होगी.