होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले कुछ जहाजों से 2 मिलिडन डॉलर तक वसूल रहा ईरान, भारत जहाजों के साथ क्या हो रहा?
होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान द्वारा कथित टोल वसूली की खबरों के बीच भारत ने सुरक्षित और मुक्त नौवहन की मांग दोहराई है. भारतीय जहाजों को फिलहाल राहत मिली है, लेकिन अनिश्चितता बनी हुई है.
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर वैश्विक चर्चा के केंद्र में है. ईरान द्वारा कुछ जहाजों से भारी ट्रांजिट फीस वसूलने की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग इंडस्ट्री में हलचल पैदा कर दी है. भारत, जो इस मार्ग पर ऊर्जा सप्लाई के लिए काफी हद तक निर्भर है, ने साफ किया है कि वह इस मुद्दे पर फ्री और सेफ नेविगेशन का समर्थन करता रहेगा. हालांकि, भारतीय जहाजों की स्थिति को लेकर अब भी कई सवाल बने हुए हैं.
2 मिलियन डॉलर तक वसूल रहा ईरान
ईरान के संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति से जुड़े एक वरिष्ठ नेता ने हाल ही में यह दावा किया कि कुछ जहाजों से 2 मिलियन डॉलर तक की फीस ली जा रही है. इसे उन्होंने देश की स्ट्रेंथ का प्रतीक बताया. फरवरी के अंत में अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए हमलों के बाद से यह जलमार्ग और अधिक संवेदनशील हो गया है. होर्मुज स्ट्रेट, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है, वैश्विक तेल सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता है. ऐसे में यहां किसी भी तरह की बाधा का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय है.
भारत का स्पष्ट रुख
भारत ने इस मुद्दे पर अपना स्टैंड बिल्कुल साफ रखा है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि ईरान के साथ किसी भी प्रकार के टोल को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई है. भारत लगातार यह कहता रहा है कि इस जलमार्ग में फ्री और सेफ मूवमेंट सुनिश्चित होना चाहिए. भारत को “फ्रेंडली कंट्री” मानते हुए ईरान ने अभी तक भारतीय जहाजों को राहत दी है. हालांकि, भविष्य में स्थिति कैसी होगी, इस पर सरकार ने फिलहाल कोई अनुमान लगाने से इनकार किया है.
भारतीय जहाजों पर असर
जानकारी के मुताबिक, अब तक कम से कम आठ भारतीय झंडे वाले एलपीजी टैंकर इस मार्ग से गुजर चुके हैं. फिर भी, शिपिंग कंपनियां सतर्क हैं और स्थिति साफ होने का इंतजार कर रही हैं. सरकार ने घरेलू स्तर पर गैस के इस्तेमाल को संतुलित करने के कदम भी उठाए हैं. इसका असर यह हुआ है कि ग्रे मार्केट में कीमतें सामान्य से चार गुना तक बढ़ गई हैं. भारत अपनी तेल और गैस जरूरतों का लगभग 90% आयात करता है, जिसमें बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आता है.
अनिश्चितता और वैश्विक असर
हालांकि युद्धविराम की घोषणा हो चुकी है, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुआ है. जहाजों की आवाजाही पहले के मुकाबले काफी कम है. अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार प्राकृतिक जलमार्गों पर कोई ट्रांजिट शुल्क नहीं होना चाहिए, लेकिन यहां स्थिति अलग नजर आ रही है. ईरान ने इस क्षेत्र पर अपने नियंत्रण को औपचारिक रूप देने की बात भी कही है. दूसरी ओर, अमेरिका और यूरोप ने साफ किया है कि यहां बिना किसी शुल्क के आवाजाही सुनिश्चित होनी चाहिए. ऐसे में यह मुद्दा आने वाले दिनों में और जटिल हो सकता है.