मुझे गिरफ्तार करने की हिम्मत की... HC में स्वतंत्र भारद्वाज ने दिल्ली पुलिस पर साधा निशाना, याचिका खारिज

इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज को जंतर-मंतर मारपीट मामले में 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है;

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Ashutosh Rai

स्वतंत्र भारद्वाज को 4 सितंबर को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लेकर दिल्ली लाया गया था. एक दिन की पुलिस हिरासत पूरी होने के बाद उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश किया गया. अदालत ने उन्हें 21 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.

FIR को लेकर हाई कोर्ट में हुई बहस

सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट में भारद्वाज की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई. उनके वकील ने दावा किया कि दिल्ली पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के लिए बुलंदशहर तक गई. वहीं सुप्रीम कोर्ट कथित तौर पर सभी FIR रद्द कर चुका है. पुलिस ने इसका विरोध करते हुए कहा कि इस मामले की FIR सुप्रीम कोर्ट ने रद्द नहीं की है. इसके बाद हाई कोर्ट ने पुलिस से साफ जवाब मांगा कि संबंधित FIR अभी लागू है या नहीं और तुरंत हलफनामा या बयान देने को कहा.

14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए

4 सितंबर को बुलंदशहर में पकड़े जाने के बाद भारद्वाज को दिल्ली लाया गया था. 5 सितंबर को कोर्ट ने पुलिस को एक दिन पूछताछ की अनुमति दी थी. पुलिस हिरासत खत्म होने के बाद उन्हें रविवार को न्यायिक हिरासत में भेजा गया. सोमवार को तिहाड़ जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विशेष जज सौरभ प्रताप सिंह लालर के सामने पेश किया गया. अदालत ने संजय आजाद पर 23 जून को हुए कथित हमले के मामले में उनकी न्यायिक हिरासत 14 दिन बढ़ाकर 21 सितंबर तक कर दी.


पॉडकास्ट के बाद शुरू हुआ विवाद

यह कार्रवाई एक वीडियो पॉडकास्ट में दिए गए कथित बयान के बाद हुई, जिसमें भारद्वाज ने जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान आजाद का सिर फोड़ने का दावा किया था. बाद में उन्होंने कहा कि उन्होंने ऐसा आत्मरक्षा में किया था. पुलिस के मुताबिक आजाद को लगी चोट मामूली थी और स्टील के ब्रेसलेट से लगी थी. बाद में FIR में SC/ST एक्ट और आपराधिक धमकी की धाराएं जोड़ी गईं. एक किशोर कार्यकर्ता की शिकायत पर POCSO एक्ट के तहत अलग FIR भी दर्ज की गई.