भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से अटकी ट्रेड डील अब फाइनल होने के कगार पर है. भारत का एक उच्चस्तरीय शिष्टमंडल वाशिंगटन डीसी का दौरा करने वाला है, जहां इस समझौते को अंतिम रूप दिया जाएगा. इससे पहले भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि यह डील दोनों देशों के लिए ‘विन-विन’ साबित होगी. यह संकेत बेहद अहम है क्योंकि जब अमेरिकी राजदूत खुद इसे फायदे का सौदा बता रहे हैं, तो समझ लीजिए कि बातचीत अपने अंतिम और सबसे पुख्ता दौर में है.
इस ट्रेड डील से भारत को होने वाले सबसे बड़े फायदों में से एक होगा हमारे निर्यात क्षेत्र का तेजी से बढ़ना. फिलहाल भारत अमेरिका को दवाइयां, आईटी सेवाएं, टेक्सटाइल, चमड़े का सामान और आभूषण भारी मात्रा में भेजता है. एक बार डील फाइनल हो जाने के बाद अमेरिका इन उत्पादों पर लगने वाले आयात शुल्क में भारी कटौती कर सकता है. इसका सीधा मतलब यह हुआ कि भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में सस्ते हो जाएंगे. सस्ते उत्पादों की मांग बढ़ेगी और हमारे निर्यातकों को बड़े पैमाने पर ऑर्डर मिलने लगेंगे. यह उन छोटे और मझोले कारोबारियों के लिए भी सुनहरा अवसर लेकर आएगा जो अभी तक अमेरिकी बाजार में सीधे प्रवेश नहीं कर पाए थे.
दुनिया भर की बड़ी कंपनियां आज चीन का विकल्प तलाश रही हैं. अमेरिका की ‘चाइना प्लस वन’ नीति का सबसे बड़ा फायदा भारत को मिलने वाला है. जब भारत और अमेरिका के बीच औपचारिक ट्रेड डील होगी तो अमेरिकी कंपनियों को भारत में निवेश करने में ज्यादा सुरक्षा और भरोसा महसूस होगा. इससे देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की बाढ़ आने की पूरी संभावना है. नए कारखाने लगेंगे, नई फैक्ट्रियां खुलेंगी और सबसे अहम बात यह कि लाखों भारतीय युवाओं के लिए रोजगार के नए मौके तैयार होंगे. यह सिर्फ बड़ी कंपनियों के लिए ही नहीं, बल्कि मिड-लेवल और स्टार्टअप्स के लिए भी एक बड़ा अवसर होगा.
भारत का आईटी और सर्विस सेक्टर पहले से ही दुनिया में अग्रणी है. इस नई डील के जरिए हमारे आईटी प्रोफेशनल्स के लिए अमेरिकी बाजार में काम करना और भी आसान हो जाएगा. सबसे अहम बात यह है कि इस समझौते के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सेमीकंडक्टर और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों पर भी सहयोग बढ़ेगा. अमेरिका की एडवांस तकनीक भारतीय कंपनियों को सीधे उपलब्ध होगी, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को नई रफ्तार मिलेगी. यह भारत को वैश्विक टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन में एक मजबूत स्थान दिलाएगा.
कूटनीति की दृष्टि से यह समझौता सिर्फ एक व्यापारिक डील नहीं है. यह चीन के लिए एक बहुत बड़ा संदेश है. अमेरिका का व्यापार के मोर्चे पर भारत के साथ इस तरह साथ खड़ा होना यह दिखाता है कि वैश्विक सप्लाई चेन में अब भारत की अहमियत कितनी बढ़ गई है. सर्जियो गोर का यह ट्वीट इस बात का सबूत है कि यह डील भारतीय अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देने वाली है. हालांकि अभी भी कुछ मुद्दों पर अंतिम सहमति बाकी है, लेकिन दोनों तरफ से मिल रहे सकारात्मक संकेत बताते हैं कि अब यह डील बनती हुई दिख रही है.