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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोले जाने को लेकर जद्दोजहत, ब्रिटेन में होने वाली बैठक में हिस्सा लेगा भारत

हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए ब्रिटेन ने भारत समेत कई देशों को बातचीत के लिए बुलाया है. भारत के विदेश सचिव इस बैठक में शामिल होंगे और सुरक्षित समुद्री मार्ग पर चर्चा करेंगे.

Sagar Bhardwaj

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्ग हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है. यूनाइटेड किंगडम ने भारत समेत कई देशों को इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को दोबारा सुरक्षित और चालू करने के लिए बातचीत के लिए आमंत्रित किया है. भारत की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिस्री इस बैठक में हिस्सा लेंगे, जहां वैश्विक ऊर्जा सप्लाई और जहाजों की सुरक्षा पर अहम चर्चा होगी.

क्यों अहम है हॉर्मुज मार्ग

हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त और जरूरी समुद्री रास्तों में से एक है. इसी रास्ते से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई होती है. हालिया संघर्ष के कारण इस क्षेत्र में खतरा बढ़ गया है, जिससे वैश्विक बाजार और ऊर्जा कीमतों पर असर पड़ा है. ऐसे में इस मार्ग को फिर से सुरक्षित बनाना सभी देशों के लिए जरूरी हो गया है.

भारत की सक्रिय कूटनीति

भारत इस मामले में लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहा है. वह क्षेत्र के देशों, खासकर ईरान के संपर्क में है ताकि भारतीय जहाजों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के जारी रह सके. भारत के लिए यह मार्ग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से पूरा करता है.

 सुरक्षित पार हो रहे भारतीय जहाज

विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक छह भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से इस मार्ग को पार कर चुके हैं. इन जहाजों में एलपीजी और एलएनजी जैसी जरूरी ऊर्जा सप्लाई शामिल थी. यह संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किए जा रहे प्रयासों का असर दिखने लगा है और स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है.

 वैश्विक सहयोग की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि हॉर्मुज जैसे संवेदनशील क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी देशों के बीच तालमेल बेहद जरूरी है. यह बैठक इसी दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है. अगर बातचीत सफल होती है, तो इससे न केवल ऊर्जा सप्लाई सुरक्षित होगी, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी राहत मिलेगी.