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LPG संकट पर सरकार की हाई लेवल मीटिंग, पीएम मोदी ने पेट्रोलियम और विदेश मंत्री संग की चर्चा

देश में एलपीजी की भारी किल्लत के बीच सरकार ने एस्मा लागू कर घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता दी है. प्रधानमंत्री ने ईरान-इजरायल युद्ध के कारण बाधित हुई गैस सप्लाई को लेकर उच्च स्तरीय बैठक कर वैकल्पिक रास्तों पर चर्चा की है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने भारत की रसोई का बजट और सुकून दोनों बिगाड़ दिया है. ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाली तेल और गैस की सप्लाई रुक गई है. इस बड़े संकट से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेट्रोलियम और विदेश मंत्रियों के साथ आपातकालीन बैठक की है. सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त सिलेंडर सुनिश्चित करने हेतु एस्मा लागू कर औद्योगिक सप्लाई में कटौती का फैसला किया है ताकि आम जनता का गुस्सा न भड़के.

भारत सरकार ने आवश्यक सेवा प्रबंधन अधिनियम (एस्मा) लागू कर दिया है ताकि घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की किल्लत को नियंत्रित किया जा सके. अब सरकार का पूरा ध्यान आम नागरिकों की रसोई तक गैस पहुंचाने पर है. इसके तहत यह अनिवार्य किया गया है कि बाजार में उपलब्ध गैस का बड़ा हिस्सा पहले घरेलू उपभोक्ताओं को मिले. किल्लत को देखते हुए इंडस्ट्रियल यूनिट्स की सप्लाई में भारी कटौती की गई है. सरकार की प्राथमिकता है कि किसी भी सूरत में घरों में चूल्हा जलना बंद न हो.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का संकट 

वर्तमान में गैस संकट की मुख्य वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना है. ईरान ने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से होने वाली सप्लाई बाधित कर दी है. जो भारत के लिए गैस और तेल आयात का प्रमुख रास्ता है. भारत अपनी जरूरत का 62 प्रतिशत एलपीजी और करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है. इस मार्ग के लंबे समय तक बंद रहने से देश में ऊर्जा संकट और गहराने की आशंका बढ़ गई है, जो चिंता का बड़ा विषय है.

प्रधानमंत्री की हाईलेवल मीटिंग 

संकट की गंभीरता को देखते हुए पीएम मोदी ने पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ विस्तार से चर्चा की है. इस बैठक में गैस आपूर्ति के वैकल्पिक रास्तों की तलाश पर जोर दिया गया. वर्तमान में भारत अपनी गैस की 85 प्रतिशत जरूरत सऊदी अरब से पूरा करता है, जो इसी समुद्री रास्ते से आती है. सरकार अब कूटनीतिक स्तर पर इस समस्या का समाधान ढूंढने की कोशिश कर रही है ताकि ऊर्जा सुरक्षा बनी रहे.

होटल इंडस्ट्री की बढ़ती चिंता 

घरेलू सप्लाई को बचाने के लिए सरकार ने कॉमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति कम कर दी है, जिस पर होटल और रेस्तरां उद्योग ने कड़ी आपत्ति जताई है. होटल एसोसिएशन का कहना है कि कॉमर्शियल सिलेंडर न मिलने से उनका कामकाज ठप होने की कगार पर पहुंच गया है. देश की कुल एलपीजी खपत में 13 प्रतिशत हिस्सा उद्योगों और होटलों का है. सप्लाई वर्गीकरण के इस सरकारी फैसले ने व्यावसायिक क्षेत्र में भारी अनिश्चितता और बेचैनी पैदा कर दी है.

भविष्य की चुनौतियां और प्रबंधन 

भारत में सालाना करीब 31.3 मिलियन टन एलपीजी की खपत होती है, जिसमें से 87 प्रतिशत हिस्सा सीधे तौर पर घरेलू उपयोग में आता है. अब खाना बनाने के लिए एलपीजी पर निर्भरता इतनी बढ़ चुकी है कि इसकी कमी जन आक्रोश का बड़ा कारण बन सकती है. अगले कुछ दिन भारतीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होंगे. यदि अंतरराष्ट्रीय हालात में तुरंत सुधार नहीं हुआ, तो सरकार को आने वाले समय में आपूर्ति प्रबंधन के लिए और भी कड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं.