भारत-ईयू के बीच हुआ ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता, जानें ट्रंप के 'टैरिफ बम' के बीच हिंदुस्तान के लिए क्यों है मिलियन डॉलर डील?

भारत और यूरोपीय संघ ने 18 साल की बातचीत के बाद ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता पूरा किया है. प्रधानमंत्री मोदी ने इसे 2 अरब लोगों का फ्री ट्रेड जोन बताया, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगा.

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Kuldeep Sharma

नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में आयोजित 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन में भारत और यूरोपीय संघ ने अपने बहुप्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को अंतिम रूप दे दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे 'मदर ऑफ ऑल डील्स' बताते हुए कहा कि यह समझौता लगभग 2 अरब लोगों का विशाल मुक्त व्यापार क्षेत्र तैयार करेगा. यूरोपीय आयोग प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा की मौजूदगी में यह समझौता वैश्विक आर्थिक इतिहास का अहम अध्याय बन गया.

18 साल की बातचीत का ऐतिहासिक अंत

2007 में शुरू हुई भारत-ईयू व्यापार वार्ताएं आखिरकार 18 वर्षों बाद निर्णायक मोड़ पर पहुंचीं. इस समझौते के तहत 97 प्रतिशत वस्तुओं पर टैरिफ हटाने पर सहमति बनी है. इससे भारतीय निर्यातकों को यूरोप के बड़े बाजार में आसान पहुंच मिलेगी. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह करार दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच भरोसे और दीर्घकालिक साझेदारी का प्रतीक है.

2 अरब लोगों का विशाल फ्री ट्रेड जोन

प्रधानमंत्री मोदी और यूरोपीय आयोग अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस समझौते को 2 अरब आबादी वाले फ्री ट्रेड जोन की नींव बताया. यूरोपीय नेताओं के अनुसार यह दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक व्यापारिक क्षेत्र होगा. इस समझौते से भारत के 140 करोड़ लोगों और यूरोप की करोड़ों आबादी के लिए नए अवसर पैदा होंगे.

भारतीय उद्योगों को मिलेगा बड़ा फायदा

इस समझौते से भारतीय टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वैलरी, लेदर, केमिकल्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा. वहीं यूरोपीय कार, मशीनरी और हाई-टेक उत्पाद भारतीय बाजार में आसानी से प्रवेश कर सकेंगे. पीएम मोदी ने कहा कि यह डील निवेशकों का भरोसा बढ़ाएगी और 'मेक इन इंडिया' को वैश्विक ताकत देगी.

सिर्फ व्यापार नहीं, रणनीतिक साझेदारी भी

शिखर सम्मेलन में भारत-ईयू सुरक्षा और रक्षा रणनीतिक साझेदारी पर भी सहमति बनी. दोनों पक्षों ने समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोध और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था की रक्षा पर साथ काम करने का संकल्प लिया. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और तीनों सेनाध्यक्षों की मौजूदगी ने इस समझौते के रणनीतिक महत्व को और मजबूत किया.

वैश्विक अनिश्चितता में भारत-ईयू की मजबूत ढाल

राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि से शुरू हुए इस शिखर सम्मेलन का संदेश साफ था- भारत और यूरोप वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच एक-दूसरे के मजबूत साझेदार बनकर उभर रहे हैं. ब्रिटेन और ईएफटीए के साथ हुए समझौतों के साथ यह एफटीए भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था का केंद्रीय स्तंभ बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.