2012 से 2026 तक... चौथी बार BRICS की अध्यक्षता कर रहा भारत, जानें अब तक क्या-क्या बदला
भारत 2026 में चौथी बार BRICS की अध्यक्षता कर रहा है. इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में भी भारत ने इस मंच की कमान संभाली थी.
नई दिल्ली: BRICS जैसे बड़े मंच की अध्यक्षता किसी भी देश के लिए केवल मेजबानी की जिम्मेदारी नहीं होती. यह उस समय की वैश्विक चुनौतियों के बीच अपनी प्राथमिकताएं सामने रखने का मौका भी होता है. भारत ने अब तक चार बार BRICS की अध्यक्षता की है. 2012 से शुरू हुआ यह सफर 2016 और 2021 से गुजरते हुए 2026 तक पहुंचा है. हर बार परिस्थितियां बदलीं और भारत ने उसी हिसाब से मंच का एजेंडा आगे बढ़ाया.
2012: आर्थिक संकट के बीच भारत ने विकास को बनाया केंद्र
भारत ने पहली बार 2012 में BRICS की अध्यक्षता की. 29 मार्च को नई दिल्ली में चौथा BRICS शिखर सम्मेलन हुआ. इसकी थीम वैश्विक स्थिरता, सुरक्षा और समृद्धि के लिए साझेदारी थी. उस समय दुनिया 2008 09 के आर्थिक संकट से उबर रही थी. भारत ने BRICS को केवल आर्थिक चर्चा तक सीमित रखने के बजाय गरीबी उन्मूलन, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास जैसे मुद्दों से जोड़ने पर जोर दिया.
2016: विकास के साथ आतंकवाद और सुरक्षा पर फोकस
चार साल बाद 2016 में भारत ने दूसरी बार BRICS की कमान संभाली. 15 16 अक्टूबर को गोवा में आठवां BRICS शिखर सम्मेलन हुआ. इस बार जवाबदेह, समावेशी और सामूहिक समाधान पर जोर रहा. भारत ने विकास के साथ आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को भी प्रमुखता दी. ऊर्जा सुरक्षा, स्वास्थ्य, सतत विकास और क्षेत्रीय सहयोग के मुद्दे सामने आए. BIMSTEC के जरिए क्षेत्रीय जुड़ाव को भी भारत ने महत्व दिया.
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2021: कोरोना के बीच स्वास्थ्य और तकनीक पर जोर
2021 में भारत ने तीसरी बार अध्यक्षता संभाली. 9 सितंबर को 13वां BRICS शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ. यह वह समय था जब कोरोना महामारी ने स्वास्थ्य के साथ अर्थव्यवस्था और आपूर्ति श्रृंखला को भी प्रभावित किया था. ऐसे दौर में भारत ने डिजिटल स्वास्थ्य, अंतरिक्ष तकनीक और बहुपक्षीय सुधार को महत्व दिया. BRICS देशों के बीच सहयोग को जारी रखने, मजबूत करने और साझा सहमति बनाने की दिशा में भी प्रयास किया गया.
2026: विस्तारित BRICS के बीच नई जिम्मेदारी
अब 2026 में भारत चौथी बार BRICS की अध्यक्षता कर रहा है. इस बार चुनौती पहले से अलग है, क्योंकि BRICS का दायरा भी विस्तारित हुआ है और वैश्विक परिस्थितियां भी तेजी से बदल रही हैं. भारत के सामने नवाचार और सहयोग को मजबूत करने के साथ मंच को ज्यादा प्रभावी बनाने की जिम्मेदारी है. ग्लोबल साउथ की आवाज को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से रखने पर भी विशेष ध्यान है.