हसीना विवाद के बीच भारत ने तारिक रहमान की क्यों की तारीफ? बांग्लादेश के साथ रिश्ते संभालने की नई रणनीति
शेख हसीना के मुद्दे पर भारत-बांग्लादेश तनाव के बीच नई दिल्ली ने तारिक रहमान से संवाद बढ़ाया है. इसके पीछे रिश्ते सुधारने और BRICS कूटनीति को मजबूत करने की रणनीति है.
भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में हालिया तनाव के बीच भारतीय हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने 10 अगस्त को ढाका में प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात की. यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के भारत से दिए गए हालिया संबोधन को लेकर ढाका ने कड़ी आपत्ति जताई है. त्रिवेदी ने बातचीत के जरिए द्विपक्षीय समस्याओं के समाधान पर भरोसा जताते हुए रहमान की नेतृत्व क्षमता की सराहना की.
'जनता से जुड़े नेता' बताकर दिया कूटनीतिक संदेश
मुलाकात के बाद त्रिवेदी ने तारिक रहमान को लोगों से जुड़ा नेता बताया और कहा कि जब दो नेता आमने-सामने बैठकर बातचीत करते हैं तो कई समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है. यह बयान केवल व्यक्तिगत प्रशंसा नहीं माना जा रहा, बल्कि नई दिल्ली के उस रुख को भी दर्शाता है जिसमें वह बांग्लादेश की मौजूदा निर्वाचित सरकार के साथ संबंधों को आगे बढ़ाना चाहती है. फरवरी में रहमान की चुनावी जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें बधाई देते हुए द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई थी.
हसीना के संबोधन से क्यों बढ़ा विवाद
5 अगस्त के आसपास नई दिल्ली से शेख हसीना के सार्वजनिक संबोधन के बाद ढाका ने भारत के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया. बांग्लादेश सरकार ने आरोप लगाया कि ऐसे कार्यक्रम द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य करने की कोशिशों को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसके बाद भारत ने स्पष्ट किया कि उस मीडिया कार्यक्रम के आयोजन में सरकार की कोई भूमिका नहीं थी और वहां बांग्लादेश सरकार के संबंध में कही गई बातों से नई दिल्ली को नहीं जोड़ा जाना चाहिए. इस तरह भारत ने हसीना के सार्वजनिक राजनीतिक संदेश और अपनी आधिकारिक विदेश नीति के बीच दूरी बनाए रखी.
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दिल्ली की नीति: हसीना अलग, सरकार के साथ रिश्ते अलग
भारत का मौजूदा रुख यह संकेत देता है कि शेख हसीना के साथ उसके पुराने संबंध और बांग्लादेश की वर्तमान सरकार के साथ आधिकारिक राजनयिक रिश्ते दो अलग विषय हैं. नई दिल्ली के लिए बांग्लादेश के साथ सीमा, व्यापार, सुरक्षा, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर संवाद जारी रखना महत्वपूर्ण है. इसलिए हसीना प्रकरण पर मतभेद के बावजूद सरकार-से-सरकार संपर्क बनाए रखना भारत की व्यावहारिक कूटनीति का हिस्सा दिखाई देता है.
BRICS ने बढ़ाई इस मुलाकात की अहमियत
इस पूरे घटनाक्रम में BRICS शिखर सम्मेलन भी महत्वपूर्ण है. भारत 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें BRICS सम्मेलन की मेजबानी करेगा और उसने गैर-सदस्य बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को विशेष अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया है. बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि निमंत्रण पर सरकार विचार कर रही है. ऐसे में नई दिल्ली की कोशिश है कि मौजूदा द्विपक्षीय मतभेदों के बावजूद ढाका के साथ संवाद की गुंजाइश बनी रहे.
रिश्तों में आगे की राह आसान नहीं
भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों में सुधार की राह अभी कई संवेदनशील मुद्दों से होकर गुजरती है. शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग, सीमा संबंधी विवाद और दोनों देशों के बीच राजनीतिक अविश्वास प्रमुख चुनौतियां हैं. इसके बावजूद दोनों पक्षों के लिए पड़ोसी होने के कारण संवाद जरूरी है. ऐसे में तारिक रहमान की प्रशंसा को भारत की ओर से तनाव कम करने, संपर्क बनाए रखने और भविष्य के लिए कूटनीतिक रास्ते खुले रखने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है.