नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से लगातार 13वीं बार राष्ट्र को संबोधित करते हुए भारत की आर्थिक यात्रा को देश की सबसे बड़ी उपलब्धियों में बताया. उन्होंने कहा कि 140 करोड़ भारतीयों के सामूहिक संकल्प और परिश्रम ने वह बदलाव संभव किया है, जिसकी कभी कल्पना भी मुश्किल मानी जाती थी.
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को दोहराते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियां इस बात का प्रमाण हैं कि देश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है. उनके अनुसार भारत की प्रगति केवल आंकड़ों की कहानी नहीं, बल्कि करोड़ों नागरिकों की भागीदारी और विश्वास का परिणाम है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समय भारत को वैश्विक स्तर पर 'Fragile Five' देशों में गिना जाता था, लेकिन आज वही भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बन चुका है. उन्होंने इस बदलाव को देशवासियों के सामूहिक संकल्प और निरंतर प्रयासों का परिणाम बताया. उन्होंने कहा कि 140 करोड़ भारतीयों की इच्छाशक्ति अब इतनी मजबूत हो चुकी है कि देश के विकास के रास्ते में कोई बाधा स्थायी नहीं रह सकती. यही आत्मविश्वास विकसित भारत के लक्ष्य को नई गति देता है.
प्रधानमंत्री ने पिछले 12 वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि रक्षा उत्पादन चार गुना बढ़ा है. वहीं खादी और ग्रामोद्योग का उत्पादन पांच गुना तथा इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण सात गुना तक पहुंच गया है. उन्होंने यह भी कहा कि मोबाइल फोन उत्पादन में 33 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है, जबकि डिजिटल लेनदेन में 100 प्रतिशत का विस्तार हुआ है. इन उपलब्धियों को उन्होंने आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव बताया.
अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने कहा कि विकास का असली अर्थ तब है, जब उसका लाभ सामान्य नागरिक तक पहुंचे. उन्होंने पाइप से पेयजल, एलपीजी कनेक्शन और शौचालय निर्माण जैसी योजनाओं को इसी परिवर्तन का उदाहरण बताया. उनके अनुसार बुनियादी सुविधाओं का विस्तार केवल जीवन स्तर सुधारने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे देश के करोड़ों परिवारों में सम्मान, स्वास्थ्य और आत्मविश्वास भी बढ़ा है.
प्रधानमंत्री ने बदलते भारत की आकांक्षाओं के अनुरूप सुधारों की आवश्यकता पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि 21वीं सदी का भारत पिछली सदी के कानूनों और संस्थागत ढांचे के भरोसे आगे नहीं बढ़ सकता. उन्होंने संकेत दिया कि तेज़ विकास के लिए शासन व्यवस्था और कानूनी ढांचे में समयानुकूल बदलाव जरूरी हैं. उनके मुताबिक सुधार ही आधुनिक भारत की प्रगति का सबसे मजबूत आधार बनेंगे.
स्वतंत्रता के बाद की यात्रा का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में हमेशा आगे बढ़ने की क्षमता थी, लेकिन कई बार वह अपनी संभावनाओं तक नहीं पहुंच पाया. पिछले 12 वर्षों ने दिखाया है कि जब पूरा देश एक लक्ष्य के साथ आगे बढ़ता है तो असंभव भी संभव हो जाता है. उन्होंने विश्वास जताया कि विकसित भारत 2047 का संकल्प अधूरा नहीं रहेगा. प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की विकास यात्रा का सबसे बड़ा इंजन उसके नागरिक हैं और यही शक्ति भारत को आने वाले वर्षों में और तेज़ गति से आगे ले जाएगी.