कनाडा से हिंदू सेना प्रमुख को आया फोन, कहा-सिर धड़ से अलग कर देंगे, अजमेर दरगाह से जुड़ा है मामला
Ajmer Dargah Case:अजमेर दरगाह को हिंदू मंदिर बताकर कोर्ट में याचिका दायर करने वाले हिंदू सेना के प्रमुख विष्णु गुप्ता को जान से मारने की धमकी मिली है. मामले को लेकर विष्णु गुप्ता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है.
Ajmer Dargah Case: हिंदू सेना के प्रमुख विष्णु गुप्ता ने अजमेर में सूफी संत मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह को शिव मंदिर के ऊपर बनाए जाने के खिलाफ याचिका दायर की है.जिसके बाद उन्हें जान से मारने की धमकी मिली है. गुप्ता को भारत और कनाडा से सिर कलम करने की धमकी दी जा रही है, जिससे विवाद बढ़ रहा है. हिंदू इस जगह के लिए मांग कर रहे हैं, जो इसके बहु-धार्मिक उपासकों के विपरीत है. अगली अदालती सुनवाई 20 दिसंबर को होगी.
हिंदू सेना के प्रमुख विष्णु गुप्ता ने अजमेर दरगाह को शिव मंदिर के ऊपर बनाए जाने का दावा करते हुए दीवानी मुकदमा दायर किया था.उन्होंने शनिवार को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि याचिका दायर करने पर उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं. गुप्ता ने कहा कि उन्होंने दिल्ली के बाराखंभा रोड पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है. गुप्ता ने बताया कि उन्हें दो धमकी भरे कॉल आए, जिसमें से एक भारत और दूसरा कनाडा का नंबर है. उन्होंने कहा कि "कनाडा से कॉल करने वाले ने अजमेर कोर्ट में याचिका दायर करने पर मेरा सिर कलम करने की धमकी दी. उसने धमकी दी कि अजमेर दरगाह के संबंध में याचिका दायर करके मैंने बहुत बड़ी गलती की है."
पुलिस जांच में जुटी
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पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "शिकायत दोपहर करीब तीन बजे दर्ज की गई और हम इसकी जांच कर रहे हैं. उचित कार्रवाई की जाएगी." गुप्ता ने कहा कि वह ऐसी धमकियों से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने मांग की है कि राजस्थान के अजमेर में दरगाह को संकट मोचन महादेव मंदिर घोषित किया जाए और हिंदुओं को वहां पूजा करने का अधिकार दिया जाए. दरगाह पर हर दिन हजारों श्रद्धालु धार्मिक सीमाओं को पार करते हुए आते हैं. एक अदालत ने बुधवार को दरगाह समिति, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को नोटिस जारी कर गुप्ता द्वारा दायर याचिका पर जवाब मांगा.
संभल जामा मस्जिद का केस चरम पर
अदालत द्वारा याचिका स्वीकार करने और तीनों पक्षों को नोटिस जारी करने के कदम से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है, मुस्लिम नेताओं ने इसे सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने का प्रयास करार दिया है. यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में कई ऐसे ही मंदिर-मस्जिद मुकदमों को लेकर तनाव बढ़ रहा है. अजमेर मामले की अगली सुनवाई 20 दिसंबर को है.