US Israel Iran War

एक नहीं, दूसरी बार! गुवाहाटी के कॉलेज का लड़का ऐसे बना असम का 'किंग'

हिमंत बिस्वा सरमा ने आज दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. लेकिन क्या आपको पता है कि उनके इस उपलब्धि के पीछे कितने सालों का संघर्ष रहा है. तो चलिए जानते हैं हिमंत सरमा की पूरी कहानी.

ANI
Shanu Sharma

हिमंत बिस्वा सरमा ने एक बार फिर से असम के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली है. एनडीए को मिली लगातार तीसरी जीत के बाद हिमंत सरमान को दूसरी बार मुख्यमंत्री बनाया गया. जिसके बाद से उनके राजीतिक यात्रा पर चर्चा शुरू हो गई है. लोग अपने सीएम के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने की इच्छा जाहिर कर रहे हैं. तो चलिए आज हम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा के राजनीतिक सफर पर एक नजर डालते हैं.

सीएम सरमा की रानजीतिक यात्रा गुवहाटी के बीचों-बीच स्थित कॉटन कॉलेज से शुरू हुई थी. ब्रिटिश काल में बनाए गए इस कॉलेज ने राज्य को अबतक 7 मुख्यमंत्री दिए हैं. हिमंत बिस्वा सरमा की राजनीतिक यात्रा भी यहीं से शुरू हुई थी.

AASU से शुरू किया राजनीतिक सफर

आज मुख्यमंत्री पद की दूसरी बार शपथ ले रहे हिमंत सरमा ने इसी कॉलेज के छात्रसंघ से अपना पहला चुनाव लड़ा था. पहली बार उन्होंने हॉस्टल से लेकर उन्होंने चाय की दुकान तक के चक्कर काटे थे. इस समय युवा हिमंत का नाम पूरे कॉलेज को पता चल गया था. हिमंत शुरू से ही एक तेज तर्रार और दबंग पर्सनालिटी के व्यक्ति रहे हैं. शुरुआत के दिनों में ही अपने भाषण से लोगों का दिल जीत लेते थे, जिसका नतीजा यह हुआ कि उन्हें AASU से महासचिव पद पर जीत मिली.

कॉटन कॉलेज के महासचिव बनने के बाद प्रभुल्ल महंत और भृगु फुकन जैसे लोग सरमा के करीब आ गए. इन नेताओं को सरमा के शुरुआती राजनीतिक सफर का गुरु माना जा रहा है. हालांकि इसके बाद भी सरमा कभी असम गण परिषद का हिस्सा नहीं बनें. उन्होंने कांग्रेस के तत्कालीन मुख्यमंत्री हितेश्वर सैकिया को अपना गुरु बनाया. सैकिया भी कॉटन कॉलेज के छात्र रहै है.

जालकुबारी से अपने गुरु को हराया

असम आंदोलन के दौरान सैकिया एक युवा नेता की तलाश में थे, जो युवाओं को पार्टी से जोड़ सके. इसके लिए उन्होंने काफी खोज की और फिर एक ऐसा युवा नेता पर दांव लगा दिया जो किसी से भी डरता नहीं था. हिमंत सरमा को कांग्रेस ने छात्र और युवा कल्याण सलाहकार समिति का सदस्य बनाया. इसके बाद असल राजनीति में सरमा की एंट्री हुई. पहली बार जालकुबारी से सरमा अपने गुरु कहे जाने वाले भृगु फुकन के खिलाफ मैदान में उतरे.

हालांकि सरमा को इस चुनाव में हार चखना पड़ा लेकिन इसके बाद सरमा ने कभी भी दोबारा मुड़कर पीछे नहीं देखा. उनके शुरुआती सफर में पीवी नरसिम्हा राव ने उन्हे काफी समझाया और क्षेत्र छोड़कर ना जाने की सलाह दी. जिसके बाद हिमंत जालकुबारी में टिके रहे और फिर 2001 के चुनाव में अपने गुरु कहे जाने वाले भृगु फुकन चुनाव के मैदान में पटखनी दे दी. इसके बाद से जालकुबारी उनका परमानेंट ठिकाना बन गया.

पांच बार विधायक बनने के बाद भी नहीं मिली कुर्सी

हिमंता सरमा को जालकुबारी सीट से 2001 से लेकर 2021 तक लगातार पांच बार विधायक चुना गया. हितेश्वर सैकिया के निधन के बाद तरुण गोगोई के हाथों में असम की सत्ता की चाबी मिली, जिसके बाद हिमंत सरमा के भी अच्छे दिन आ गए. सरमा लगातार सफलता की सीढ़ी चढ़ते रहे. राज्य में उन्हें वित्त, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे प्रमुख विभागों की जिम्मेदारी मिली. इन पदों पर रहते हुए उन्होंने पार्टी और मुख्यमंत्री दोनों का भरोसा जीत लिया.

पार्टी के अंदर तरुण गोगोई के बाद हिमंत सरमा का नाम लिए जाने लगा. सभी को यह उम्मीद थी कि उनके बाद सरमा को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया जाएगा, लेकिन खेल तब बदला जब तरुण गोगोई ने अपने बेटे गौरव गोगोई को अपना उत्तराधिकारी के रूप में पेश करना शुरू किया. यहीं से बगावती सुर ऊंचे होने लगे. 

राहुल गांधी की गलती से अलग हुए हिमंत?

हिमंत ने कोई भी फैसला लेने से पहले अपने आलाकमान को इस बारे में बताया था. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उनकी बातें सुनी और हिमंत के पक्ष में थी लेकिन पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी को यह बात मंजूर नही थी. हालांकि इसके बाद भी हिमंत पार्टी के लिए काम करते रहे तभी 2014 में असम में भी मोदी लहर का असर दिखा और तभी हिमंत ने तरुण गोगोई की सरकार पर भरोसा ना जताते हुए 38 विधायकों के साथ मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया.

बीजेपी में हिमंत बिस्वा सरमा की एंट्री

इसके बाद हिमंत की एंट्री बीजेपी में हुई और वह 2015 में औपचारिक रूप से बीजेपी में शामिल हो गए. इसके बाद 2016 में पहली बार असम में बीजेपी की सरकार बनी, लेकिन हिमंत का इंतजार अभी भी खत्म नहीं हुआ था. उन्होंने अपनी बारी का इंतजार किया और 10 मई 2021 को पहली बार राज्य के मुख्यमंत्री बने. पांच सालों तक काम करने के बाद एक बार फिर आज उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है.