झारखंड विधानसभा चुनाव से पहले हेमंत को जमानत, जानें क्या हैं मायने?
Hemant Soren Bail Meaning: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को हाई कोर्ट से जमानत मिल गई. सोरेन के खिलाफ राजधानी रांची में 8.86 एकड़ जमीन पर कब्जा करने का आरोप है. ED ने 30 मार्च को PMLA कोर्ट ने चार्जशीट दाखिल की थी. अब करीब 5 महीने बाद हेमंत सोरेन को हाई कोर्ट की ओर से जमानत मिल गई है. आइए, जानते हैं कि विधानसभा चुनाव से पहले हेमंत को जमानत दिए जाने के क्या मायने हैं?
Hemant Soren Bail Meaning: झारखंड विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हेमंत सोरेन को हाई कोर्ट से जमानत मिल गई. कहा जा रहा है कि हेमंत को जमानत मिलने के कई मायने हैं. झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्च के सीनियर नेता को मिली जमानत ने पार्टी को नई ताकत दी है. इस साल के आखिर में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी के कार्यकर्ताओं में भी जोश भर दिया है. 31 जनवरी को गिरफ्तार किए जाने से ठीक पहले हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा के सीनियर नेता और हेमंत सोरेन के पिता शिबू सोरेन के करीबी चंपई सोरेन को मुख्यमंत्री बनाया गया था.
हेमंत सोरेन को गिरफ्तार किए जाने के बाद जनता के बीच पत्नी कल्पना सोरेन उनका चेहरा बन गईं थीं. अपने भाषण से वे झारखंड की पहचान को जगाने और महिलाओं के बीच एक मजबूत माहौल बनाने में सफल रहीं. कल्पना सोरेन इंडिया गठबंधन के विभिन्न राष्ट्रीय स्तर के अभियानों में भी पहुंचीं और लोकसभा चुनावों के साथ ही गांडेय में हुए उपचुनाव में 26,000 वोटों से जीत हासिल की.
हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में झामुमो के नेतृत्व वाले गठबंधन को 5 सीटें मिली हैं. झामुमो को अकेले तीन सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस को दो सीटें मिलीं. भाजपा 8 सीटें जीतीं, जबकि उसके सहयोगी ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन को 1 सीट मिली. NDA गठबंधन को राज्य की सभी 5 एसटी-आरक्षित सीटों पर इंडिया गठबंधन के हाथों हार का सामना करना पड़ा.
आदिवासी इलाकों में जेएमएम की पकड़ बरकरार
भाजपा ने आदिवासी बहुल दुमका में सोरेन परिवार की बहू सीता सोरेन को चुनावी मैदान में उतारा था, लेकिन उन्हें 22 हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा. यहां से विपक्षी गठबंधन को मिली जीत ये दिखाता है कि आदिवासी बहुल इलाकों में झामुमो और उसके सहयोगियों की पकड़ बनी हुई है. हेमंत सोरेन को मिली जमानत के बाद इस पकड़ के और मजबूत होने की उम्मीद है.
भाजपा के एक नेता ने कहा कि लोकसभा चुनाव में झारखंड की आदिवासी सीटों पर भाजपा के पक्ष में कुछ भी काम नहीं आया. विधानसभा में 28 आदिवासी सीटों के लिए भाजपा किस तरह की रणनीति बनाएगी, यह महत्वपूर्ण होगा.
क्या सोरेन और सहयोगी खेलेंगे सहानुभूति कार्ड?
कहा जा रहा है कि झारखंड हाई कोर्ट से हेमंत सोरेन को मिली जमानत के बाद आने वाले विधानसभा चुनाव में जेएमएम और उसके सहयोगी सहानुभूति कार्ड खेल सकते हैं. जेएमएम के एक नेता के मुताबिक, हमने हेमंत सोरेन और मानवाधिकार कार्यकर्ता स्टेन स्वामी की तुलना की. दोनों को उत्पीड़ित वर्गों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए कार्रवाई का सामना करना पड़ा. दोनों को जेल में डाल दिया गया और उनके साथ अन्याय हुआ. अब जब हेमंत सोरेन बाहर हैं, तो स्थिति से निपटने की रणनीति में बदलाव होगा.
आने वाले विधानसभा चुनाव में हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन की आगे की भूमिका पर पार्टी के एक नेता ने कहा कि उन्हें चंपई कैबिनेट में पद मिल सकता है, क्योंकि हमें अभी भी नहीं पता कि प्रवर्तन निदेशालय (सोरेन की जमानत पर) क्या प्रतिक्रिया देगा. वे जमानत को ऊपर की अदालतों में चुनौती दे सकते हैं या हेमंत सोरेन पर अलग मामला दर्ज कर सकते हैं. किसी भी स्थिति में, कल्पना सोरेन सक्रिय राजनीति में रहेंगी.
भाजपा नेता भी मान रहे, बेल के बाद अब रणनीति में बदलाव की जरूरत
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा खेमे में भी इस बात की चर्चा हो रही है कि हेमंत सोरेन को मिली बेल के बाद अब विधानसभा चुनाव के लिए अपनी रणनीति में बदलाव की जरूरत है. भाजपा के नेताओं की ओर से बताया गया कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को प्रभारी बनाया है, जो पार्टी के लिए मजबूत रणनीति बनाएंगे.
उधर, भाजपा नेता ने माना कि हेमंत सोरेन की जेल से रिहाई पार्टी की ओर से स्थापित की जा रही कहानी के लिए तगड़ा झटका है. अब चुनावों में जाने के बाद आदिवासी आबादी पूछेगी कि हेमंत सोरेन को जमानत कैसे मिली? वे पूछेंगे कि ट्रायल कोर्ट ने (दिल्ली के मुख्यमंत्री) को जमानत क्यों दी? वे जांच पर सवाल उठाएंगे. अब जब सोरेन जेल से बाहर आ गए हैं, तो हमारे लिए चीजें कठिन हो जाएंगी.