कांग्रेस नेता राहुल गांधी इन दिनों 'जातिगत जनगणना' के सबसे मुखर चेहरे हो गए हैं. वे कहते हैं कि देश में जाति जनगणना होनी चाहिए और लोगों को उनकी हिस्सेदारी के आधार पर सरकारी नौकरियों में आरक्षण मिलना चाहिए. वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर दलित (SC/ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और महिलाओं पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाते हैं. वे कहते हैं कि बीजेपी संविधान खत्म करना चाहती है और सिर्फ सवर्णों और पूंजीपतियों की राजनीति करती है. भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी की जातिनीति का जो तोड़ ढूंढ लिया है.
हरियाणा विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने ऐसी सोशल इंजीनियरिंग की है, जिसकी काट अब कांग्रेस को ढूंढ रही है. बीजेपी ने जातिगत समीकरणों के हिसाब से ही विधानसभा चुनावों में टिकटों का बंटवारा किया है. जहां जिस जाति की बाहुलता है, वहीं उसी जाति के उम्मीदवार को उतार दिया है.
भारतीय जनता पार्टी ने हरियाणा विधानसभा चुनावों के लिए 67 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है. उस लिस्ट में कुल 14 पिछड़े, 13 दलित और 8 महिला उम्मीदवारों को उतारा गया है. भारतीय जनता पार्टी, अपने इस कदम से राहुल गांधी के आरोपों पर करारा पलटवार किया है. बीजेपी ने यह दिखाने की कोशिश की है कि वह पिछड़ों, दलितों और महिलाओं को राजनीति में उनकी पूरी हिस्सेदारी देती है.
एक तरफ बीजेपी ने तो अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है, कांग्रेस अभी नामों पर मंथन कर रही है. आम आदमी पार्टी के साथ कांग्रेस गठबंधन में उतरना चाहती है. आम आदमी पार्टी की शर्तें ऐसी हैं, जिस पर सहमति नहीं बन पा रही है. बीजेपी ने इससे पहले ही अपना काट ढूंढ लिया है.
भारतीय जनता पार्टी ने गुर्जर, यादव, कश्यप, कुम्हार, कंबोज और सैनी जैसी जातियों पर भरोसा जताया है. हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी लाडवा विधानसभा से चुनाव लड़ रहे हैं, वहां सैनी जाति का दबदबा है. राज्य में कुल 42 प्रतिशत ओबीसी हैं. जगधारी, लडवा, कैथल, इंद्री, समलखा, रेवाड़ी और बादशाहपुर विधानसभाओं में ओबीसी जातियों का दबदबा है.
साल 2014 में जब यह पार्टी सत्ता में आई, तब से ही अपनी निर्भरता केवल जाट वोटरों पर बीजेपी ने खत्म कर ली थी. कालायत से कमलेश ढांढा, पानीपत से महिपाल ढांडा, पनिहार से रणदीर पनिहार, लोारू से जेपी दलाल पर बीजेपी ने भरोसा जताया. ओपी धनखड़ बादली सीट से हैं. वे बीजेपी के जाट उम्मीदवार हैं. बीजेपी ने इस बार के कचुनाव में जातिगत समीकरणों पर जोर दिया है.
दलित वोटरों को उतारने में बीजेपी ने बरती सावधानी
बीजेपी ने दलित वोटरों को टिकट देने में सावधानी बरती है. बीजेपी ने वाल्मीकि, धानुक, बवारिया और बाजीगर जैसी जातियों को उतारा है. जाटव उम्मीदवारों को भी टिकट दिया गया है. वैश्य समुदाय के 5 लोगों को टिकट दिया गया है. बीजेपी ने दलित, अगड़ी और पिछड़ी जातियों को साधने की कोशिश की है. बीजेपी ने ब्राह्मणों और राजपूतों पर भी भरोसा जताया है. बीजेपी ने शक्तिरानी शर्मा को कालका से, अरविंद शर्मा को गोहाना से, मुकेश शर्मा को गुरुग्राम से, मूलचंद शर्मा को बल्लभगढ़ से उतारा है.
बीजेपी ने ब्राह्मण और राजपूतों के अलावा पंजाबी और जट सिखों पर भी भरोसा जताया है. बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने बताया है कि कांग्रेस जातियों में समाज को बांटती है, बीजेपी सबको हिस्सेदारी देती है. बीजेपी ने अपने टिकट बंटवारे में सबके साथ सबसे विकास का ख्याल रखा है.
बीजेपी ने 8 महिला उम्मीदवारों पर भरोसा जाताया है. शक्ति रानी शर्मा को कालका, संतोष सरवन को मुराना, कमलेश ढांडा को कालायत, सुनीता दुग्गल को रतिया, श्रुति चौधरी को तोशम, मंजू हुड्डा को गढी, रेनू डबल्ला को कालानौर और आरती सिंह राव को अटेली सीट से उतारा है. बीजेपी ने महिलाओं में भी सवर्ण, पिछड़ी और दलित जातियों का ख्याल रखा है. राहुल गांधी की 'जातिनीति' पर अभी बीजेपी भारी पड़ती नजर आई है, देखने वाली बात ये होगी कि अब कांग्रेस इसका काट कैसे ढूंढती है.
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