अंतिम सांसें गिन रहे हरीश राणा! धीरे-धीरे हटाया जा रहा लाइफ सपोर्ट सिस्टम, मां का छलका दर्द; पिता के नहीं रुक रहे आंसू
सुप्रीम कोर्ट के आदेश मुताबिक हरीश राणा के इच्छामृत्यु की तैयारी शुरू हो गई है. सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा है, जिसमें हरीश और अपनी मां और डॉक्टर केसाथ नजर आ रही हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2026 को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में रहने वाले 32 वर्षीय हरीश राणा को पैसिव यूथेनेशिया यानी निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी है. यह भारत का ऐसा पहला मामला है, जिसमें कोर्ट की मंजूरी दे दी गई है.अब कोर्ट के फैसले के मुताबिक हरीश की जिंदगी मशीनों से अलग होने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
हरीश राणा का यह मामला दिल को छूने वाला है. इस मामले में 13साल पहले घटी घटना के कारण हरीश की जिंदगी तबाह हो गई. यह मामला 20 अगस्त 2013 का है, जिसमें चंडीगढ़ सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाला छात्र अपने आखिरी सेमेस्टर की तैयारी कर रहा था. इसी दौरान उनका संतुलन बिगड़ गया और पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए.
क्या है पूरा मामला?
इस दौरान हरीश के सिर में गंभीर चोट लगी. उस समय तक लेकर अभी तक वह कोमा में है. अभी तक 13 साल से ज्यादा समय बीत गया और वे अभी भी वेजिटेटिव स्टेट में हैं. जिसका मतलब है कि उनके शरीर का कोई भी हिस्सा हिलता तक नहीं है और वे केवल आंखें झपकाते हैं. उनके इलाज के लिए परिवार ने कई अस्पतालों के दरवाजे खटखटाए.
पीजीआई चंडीगढ़ और निजी अस्पतालों के बाद दिल्ली एम्स ने उन्हें ठीक करने के लिए सारे कोशिश की गई. लेकिन सारी कोशिशें फेल हो गई. उनके इलाज के लिए परिवार को घर तक बेचना पड़ गया, लेकिन वे ठीक नहीं हो पाए. जिसके बाद परिवार ने कोर्ट से इच्छामृत्यु की मांग की. हाईकोर्ट से याचिका को खारिज कर देने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा.
सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला
सुप्रीम ने मामले से जुड़े सभी मेडिकल रिपोर्ट देखे. कई डॉक्टरों द्वारा उनके इलाज की कोई उम्मीद नहीं जताई गई. एम्स ने अदालत में एक रिपोर्ट पेश किया, जिसमें कहा गया कि उनके ठीक होने की कोई संभावना नहीं है. लाइफ सपो4ट के कारण केवल दर्द बढ़ रहा है. जिसके बाद कोर्ट ने इस मामले पर फैसला सुनाते हुए कहा कि हर व्यक्ति को गरिमा के साथ मरने का अधिकार है.
अदालत ने पैसिव यूथेनेशिया की इजाजत दे दी. अब उनके लाइफ सपोर्ट सिस्टम धीरे-धीरे हटाया जाएगा. अदालत ने एम्स को निर्देश दिया कि प्रक्रिया सम्मानजनक तरीके से की जाए. हरीश को घर से एम्स शिफ्ट कर दिया गया है. हरीश के पिता ने बेटे को तड़प को देखते हुए कहा कि इससे बेहतर मौत है. लाइफ सपोर्ट धीरे-धीरे हटाए जा रहे हैं.
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