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'सो रहे थे क्या, कैसे करें आप पर भरोसा', राजकोट हादसे पर HC ने क्या कहा? पढ़ें एक-एक डीटेल्स

गुजरात हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को राजकोट हादसे पर फटकार लगाई है. बिना किसी वैध लाइसेंस, सुरक्षा नियामकों के यह गेमिंग जोन चल रहा था और किसी ने इस पर समय से पहले एक्शन नहीं लिया. जब 28 से ज्यादा लोगों की मौत हुई, तब जाकर प्रशासन जगा.

PTI
India Daily Live

गुजरात हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को राजकोट गेमिंग जोन अग्निकांड पर जमकर खरीखोटी सुनाई है. गेमिंग जोन में आग लगने की वजह से 28 लोग जिंदा जल गए और अब प्रशासनिक लापरवाहियों की पोल खुल रही है. हाई कोर्ट ने केस की सुनवाई करते हुए यहां तक कह दिया कि क्या आप लोग सो रहे थे. हम हमें सरकार पर भरोसा नहीं है. 

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक हाई कोर्ट की स्पेशल बेंच के जज बीरेन वैष्णव और जस्टिस देवान देवसाई ने सवाल किया कि राज्य सरकार में अब भरोसा ही नहीं रहा है. उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेश के बाद भी कैसे यह हादसा हो गया. गेमिंग जोन के ऑपरेटर्स ने कोई मंजूरी नहीं ली थी वे कैसे इसे चला रहे थे.  उन्हें राजकोट नगर निगम से मंजूरी भी नहीं मिली थी कैसे उन्होंने इसे बना लिया. 

'4 साल बाद भी फायर सेफ्टी नहीं, सो रही थी क्या सरकार'
जब सरकार ने कहा कि गेमिंग जोन ने इजाजत नहीं मांगी थी तो बेंच ने जवाब दिया कि यह उनकी जिम्मेदारी है. अगर हमारे आदेश के 4 साल बाद भी फायर सेफ्टी पर कोई इंतजाम नहीं किया गया तो आरएमसी कैसे जिम्मेदार नहीं है. गेमिंग जोन में अधिकारियों की तस्वीरों पर हाई कोर्ट ने कहा है कि क्या वे खेलने गए थे. 

'28 लोग जिंदा जगे, अब जागे हैं आप'
राजकोट के नाना मावा इलाके में बने टीआरपी गेम जोन में आग लगी थी, जिसमें 28 लोग जलकर मर गए, जिनमें 12 से ज्यादा बच्चे झुलस गए. गेमिंग जोन में एक जगह सीढ़ियों पर वेल्डिंग का काम चल रहा था, तभी आग पकड़ ली और सब राख हो गया. 

राजकोट पुलिस ने इस केस में FIR दर्ज कर ली है. 6 लोग पुलिस की रडार पर है. सब पर गैर इरादतन हत्या के आरोप लगे हैं. दो लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, 4 लोग फरार चल रहे हैं. लोग अपनों की लाशों को पहचान पा रहे हैं. शवों की डीएनए सैंपलिंग के बाद ही परिजन उन्हें ले सकेंगे. केस की छानबीन जारी है.