गुजरात पुलिस ने क्रिप्टो-हवाला सिंडिकेट का किया पर्दाफाश, हमास से भी जुड़े हैं तार; करोड़ों का हुआ लेनदेन

गुजरात साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने अहमदाबाद से संचालित 226 करोड़ रुपये के अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टो-हवाला सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है. इस नेटवर्क के तार हमास, डार्क वेब और वैश्विक ड्रग गिरोहों से जुड़े हैं.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: गुजरात पुलिस की साइबर सेल ने देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले एक बड़े अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टो-हवाला नेटवर्क का पर्दाफाश किया है. अहमदाबाद से संचालित होने वाले इस सिंडिकेट के तार हमास जैसे आतंकी संगठनों, डार्क वेब ड्रग माफिया और सात से अधिक देशों में फैले संदिग्ध वित्तीय नेटवर्कों से जुड़े पाए गए हैं. जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह गिरोह अवैध तरीकों से अर्जित की गई 'डर्टी क्रिप्टो' को नकदी में बदलने के लिए हवाला चैनलों का इस्तेमाल कर रहा था.

सुरक्षा एजेंसियों ने इस पूरे ऑपरेशन के दौरान अब तक 9 शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि करीब 226 करोड़ रुपये के संदिग्ध क्रिप्टो लेनदेन की सघन जांच की जा रही है. इस जांच की शुरुआत एक संदिग्ध भारतीय आईपी एड्रेस से हुई थी, जो ऑनलाइन ड्रग ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म 'आर्टेमिस लैब' से जुड़ा था. तकनीकी विश्लेषण के बाद पुलिस अहमदाबाद के मोहसिन सादिक मुलानी तक पहुंची, जिसने इस पूरे अंतरराष्ट्रीय नेक्सस के काले कारनामों की परतें खोल दीं.

हमास और हूती संगठनों तक फंडिंग

जांच के दौरान सबसे सनसनीखेज खुलासा तब हुआ जब कुछ ट्रांजैक्शन गाजा के 'अल-काहिरा' नेटवर्क के जरिए हमास तक धन पहुंचाने वाले डिजिटल वॉलेट्स से जुड़े मिले. इन वॉलेट्स को इजराइल की सुरक्षा एजेंसी ने पूर्व में सीज किया था. इसके अलावा, अमेरिकी एजेंसी ओएफएसी द्वारा यमन के हूती संगठन 'अंसार अल्लाह' से जुड़े क्लस्टर में चिन्हित मोहम्मद जुबैर पोपटिया के वॉलेट से भी इस गुजरात नेटवर्क में बड़ी रकम ट्रांसफर होने के पुख्ता सबूत मिले हैं.

जेल से चल रहा था सिंडिकेट

जांच अधिकारियों के अनुसार, इस विशाल नेटवर्क के लिंक भारत सहित ब्रिटेन, इजराइल, यमन, ईरान, तुर्की और गाजा तक फैले हुए हैं. इस मामले का एक मुख्य आरोपी सलमान अंसारी वर्तमान में ब्रिटेन की जेल में नशीले पदार्थों की तस्करी के जुर्म में छह साल की सजा काट रहा है. इसके बावजूद, खुफिया इनपुट्स से पता चला है कि वह मार्च 2026 तक जेल की सलाखों के पीछे से ही मोबाइल और इंटरनेट के जरिए इस अवैध नेटवर्क को संचालित कर रहा था.

मोनेरो करेंसी का खतरनाक खेल

इस पूरे गोरखधंधे में सबसे अहम भूमिका मोनेरो नाम की एक बेहद गुप्त क्रिप्टोकरेंसी की पाई गई है. आरोपियों के पास से दो मोनेरो वॉलेट मिले हैं, जिनमें करोड़ों के लेनदेन का रिकॉर्ड है. मोनेरो एक प्राइवेसी कॉइन है, जो अपनी विशेष तकनीक के कारण पैसे भेजने वाले, पाने वाले और कुल रकम की जानकारी को पूरी तरह गायब कर देता है. इसी वजह से दुनिया भर के ड्रग कार्टेल और टेरर फाइनेंसिंग नेटवर्क इसे सबसे ज्यादा पसंद करते हैं.

साइबर ठगी और सरगना की तलाश

पुलिस की पड़ताल में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह द्वारा इस्तेमाल किए गए बैंक खातों के खिलाफ देश भर में 935 साइबर फ्रॉड की शिकायतें दर्ज हैं. इससे यह स्पष्ट होता है कि सिंडिकेट आम लोगों से ठगी गई रकम को भी क्रिप्टो में बदल रहा था. फिलहाल गिरफ्तार किए गए नौ आरोपियों के अलावा, मुख्य सरगना मोहम्मद जुबैर पोपटिया अभी विदेश में छुपा हुआ है, जिसे भारत लाने के लिए प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.