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India Daily

ग्रीन इंडिया मिशन पर CAG की बड़ी रिपोर्ट, 10 साल में जंगल बढ़ाने का लक्ष्य 98% तक पीछे, सामने आईं ये बड़ी खामियां

कैग की रिपोर्ट ने ग्रीन इंडिया मिशन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं. दस साल में वन आवरण बढ़ाने का लक्ष्य लगभग पूरा नहीं हुआ. योजना, निगरानी और वित्तीय प्रबंधन में खामियां सामने आईं.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
ग्रीन इंडिया मिशन पर CAG की बड़ी रिपोर्ट, 10 साल में जंगल बढ़ाने का लक्ष्य 98% तक पीछे, सामने आईं ये बड़ी खामियां
Courtesy: ai generated

नई दिल्ली: देश में हरियाली बढ़ाने और जंगलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए चलाए जा रहे ग्रीन इंडिया मिशन को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी कैग ने चिंताजनक तस्वीर पेश की है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2015-16 से 2024-25 के बीच मिशन के तहत तय वन आवरण लक्ष्य का अधिकांश हिस्सा हासिल नहीं हुआ.

दस साल में लक्ष्य से बहुत पीछे रहा मिशन

संसद में बुधवार को पेश की गई प्रदर्शन ऑडिट रिपोर्ट में कैग ने बताया कि ग्रीन इंडिया मिशन के तहत वन आवरण बढ़ाने का लक्ष्य 14 लाख हेक्टेयर रखा गया था. इसके मुकाबले वास्तविक बढ़ोतरी केवल 0.03 लाख हेक्टेयर रही. यानी तय लक्ष्य की तुलना में उपलब्धि करीब 98 प्रतिशत कम रही. इसी तरह वन क्षेत्र की गुणवत्ता सुधारने का लक्ष्य भी पूरा नहीं हुआ. 14 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले केवल 0.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सुधार दर्ज किया गया, जो करीब 92 प्रतिशत की कमी है.

योजना और निगरानी में कई खामियां

कैग ने मिशन के कमजोर प्रदर्शन के पीछे कई प्रशासनिक और योजनागत कमियां गिनाई हैं. रिपोर्ट के अनुसार, पेड़ लगाने के लिए कई जगहों पर सही भू-दृश्य या क्षेत्र का चयन नहीं किया गया. अलग-अलग सरकारी योजनाओं के बीच अपेक्षित तालमेल भी नहीं बनाया गया. इसके अलावा वित्तीय प्रबंधन में गड़बड़ियां, कमजोर योजना निर्माण, विभागों के बीच समन्वय की कमी और निगरानी व्यवस्था में खामियां भी सामने आईं. इन वजहों से मिशन के तय उद्देश्यों को जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू करने में बाधा आई.

सिर्फ पेड़ लगाना नहीं था मिशन का लक्ष्य

ग्रीन इंडिया मिशन का उद्देश्य केवल नए पेड़ लगाना नहीं था. इसके तहत जंगलों और गैर-जंगल क्षेत्रों में हरित आवरण की गुणवत्ता सुधारना, जैव विविधता को मजबूत करना, जल संबंधी पारिस्थितिकी सेवाओं को बेहतर बनाना और कार्बन को सोखने की क्षमता बढ़ाना भी शामिल था. इसके साथ ही जंगलों पर निर्भर परिवारों की आजीविका और आय में सुधार को भी मिशन का हिस्सा बनाया गया था. लेकिन कैग की रिपोर्ट बताती है कि इन व्यापक उद्देश्यों की दिशा में अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी.

जलवायु परिवर्तन से लड़ाई पर भी असर

कैग की टिप्पणियां ऐसे समय आई हैं जब जंगलों और पेड़ों को जलवायु परिवर्तन से निपटने का अहम साधन माना जाता है. रिपोर्ट में बताया गया कि वनीकरण के दौरान कुछ महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया. इससे हरित आवरण बढ़ाने की कोशिशों का असर सीमित रहा. वन क्षेत्र की गुणवत्ता और विस्तार में लक्ष्य के मुकाबले भारी अंतर यह सवाल भी उठाता है कि भविष्य में मिशन की योजना, धन के इस्तेमाल और निगरानी को किस तरह मजबूत किया जाएगा.