स्मार्टफोन में आधार ऐप का रखना अनिवार्य नहीं, विवाद के बाद सरकार ने वापस लिया प्रस्ताव

सरकार ने स्मार्टफोन में आधार ऐप को अनिवार्य रूप से पहले से इंस्टॉल करने का प्रस्ताव वापस ले लिया. एप्पल और सैमसंग जैसी कंपनियों ने सुरक्षा और लागत को लेकर इसका विरोध किया था. आईटी मंत्रालय ने हितधारकों से सलाह-मशविरे के बाद यह फैसला किया.

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Sagar Bhardwaj

भारत सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए उस प्रस्ताव को वापस ले लिया है, जिसके तहत सभी स्मार्टफोन निर्माताओं के लिए अपने डिवाइसों में आधार ऐप पहले से इंस्टॉल करना अनिवार्य कर दिया जाना था. यह प्रस्ताव भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) की ओर से आया था. हालांकि, एप्पल और सैमसंग सहित प्रमुख कंपनियों ने इस पर सुरक्षा, लागत और उत्पादन जटिलताओं को लेकर गंभीर आपत्तियां जताईं. शुक्रवार को UIDAI ने साफ कर दिया कि आईटी मंत्रालय इस बाध्यता के पक्ष में नहीं है.

क्यों हुआ था इसका विरोध

जनवरी महीने में UIDAI ने आईटी मंत्रालय से अनुरोध किया था कि वह एप्पल, गूगल और अन्य बड़ी कंपनियों से बातचीत करे, ताकि स्मार्टफोन में आधार ऐप को अनिवार्य रूप से प्री-इंस्टॉल कराने की योजना को आगे बढ़ाया जा सके. लेकिन इस कदम को जैसे ही उद्योग के सामने रखा गया, वैसे ही विरोध शुरू हो गया. खासतौर पर एप्पल और सैमसंग ने डिवाइस सुरक्षा को लेकर सबसे सख्त रुख अपनाया. उनका तर्क था कि इससे उनके ऑपरेटिंग सिस्टम की अखंडता पर खतरा होगा. साथ ही, कंपनियों ने यह भी कहा कि इस अनिवार्यता से उत्पादन लागत बढ़ेगी, क्योंकि उन्हें भारतीय बाजार और निर्यात बाजार के लिए अलग-अलग मैन्युफैक्चरिंग लाइनें चलानी पड़ेंगी.

शुक्रवार (18 अप्रैल) को UIDAI ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि आईटी मंत्रालय ने इस प्रस्ताव की गहन समीक्षा की और ‘इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग से जुड़े हितधारकों के साथ परामर्श’ के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि वह स्मार्टफोन में आधार ऐप को अनिवार्य रूप से प्री-इंस्टॉल करने के पक्ष में नहीं है. हालांकि, बयान में यह नहीं बताया गया कि आखिर इस फैसले के पीछे क्या वजह रही. गौर करने वाली बात यह है कि पिछले दो साल में यह छठी बार था, जब सरकार ने फोन में सरकारी ऐप्स को प्री-लोड करने की कोशिश की और हर बार उद्योग के विरोध के चलते उसे पीछे हटना पड़ा.

यह पहला मामला नहीं

यह पहला मौका नहीं है, जब सरकार को ऐसे प्रस्ताव से पलटना पड़ा हो. पिछले साल दिसंबर में ही सरकार ने स्मार्टफोन कंपनियों के लिए एक टेलीकॉम सुरक्षा ऐप- ‘संचार साथी’- को अनिवार्य रूप से प्री-इंस्टॉल करने का आदेश दिया था. उस समय भी कंपनियों ने जमकर विरोध किया था, जिसके बाद सरकार को कुछ ही दिनों में अपना आदेश वापस लेना पड़ा था. नई दिल्ली स्थित डिजिटल अधिकार समूह ‘इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन’ के संस्थापक अपर गुप्ता ने सरकार के इस नवीनतम फैसले का स्वागत किया है. उनका कहना है कि ऐसे अन्य प्रस्तावों को भी वापस लिया जाना चाहिए, क्योंकि उनके पास न तो कोई विधायी आधार है और न ही कोई स्पष्ट सार्वजनिक नीति का उद्देश्य.