Leh Violence: लद्दाख में स्टेटहुड और शेड्यूल-6 की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा के बाद केंद्र सरकार ने इस आंदोलन के अगुवाकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का FCRA लाइसेंस रद्द कर दिया है, जिसके बाद सोनम वांगचुक के एनजीओ और उनके संस्थानों को विदेशों से फंडिंग नहीं मिल पाएगी.
लद्दाख में तनावपूर्ण माहौल के बीच गृह मंत्रालय ने सोनम वांगचुक की संस्था सेमोल का FCRA पंजीकरण रद्द कर दिया है. बीजेपी सूत्रों ने वांगचुक पर वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें विदेशी फंडिंग के बिना 1.5 करोड़ रुपये प्राप्त करना, नौ बैंक खाते छिपाना और 2.3 करोड़ रुपये विदेश भेजना शामिल है. सीबीआई ने भी जांच शुरू की है, जो वांगचुक की संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रही है.
वित्तीय घोटालों के आरोप में घिसे वांगचुक
लद्दाख की बर्फीली वादियों में चल रहे आंदोलन की चमक अब फीकी पड़ने लगी है. पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक, जिन्हें हाल ही में हिंसक विरोध प्रदर्शनों के चेहरे के रूप में देखा गया, अब वित्तीय घोटालों के आरोपों से घिरे हैं. बीजेपी के शीर्ष सूत्रों का दावा है कि यह सक्रियता का मुखौटा है, जिसके पीछे विदेशी धन का खेल छिपा है. एफसीआरए रद्दीकरण और सीबीआई जांच ने न केवल वांगचुक की छवि को झकझोरा है, बल्कि लद्दाखी लोगों की सच्ची मांगों को भी राजनीतिक रंग दे दिया है.
वांगचुक के संस्थाओं पर अनियमितताओं का साया
सोनम वांगचुक की हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स लद्दाख (हियाल) पर सबसे ज्यादा सवाल उठे हैं. वित्तीय वर्ष 2023-24 में 6 करोड़ रुपये के दान से अगले साल यह 15 करोड़ तक पहुंच गया. सात खातों में से चार छिपाए गए, और बिना एफसीआरए के 1.5 करोड़ विदेशी रेमिटेंस प्राप्त हुए, जो एफसीआरए की धारा 11 का सीधा उल्लंघन है. सेमोल के नौ में से छह खाते भी अघोषित बताए जा रहे हैं. गृह मंत्रालय ने गुरुवार को सेमोल का पंजीकरण रद्द करते हुए कई उल्लंघनों का हवाला दिया.
निजी फर्म और व्यक्तिगत वित्त का रहस्य
वांगचुक की नई निजी कंपनी शेश्योन इनोवेशंस प्राइवेट लिमिटेड पर भी नजर टिकी है, जहां वे निदेशक हैं. हियाल से इस फर्म में 6.5 करोड़ का बड़ा ट्रांसफर हुआ, जबकि कंपनी का शुद्ध लाभ 6.13 प्रतिशत से गिरकर 1.14 प्रतिशत रह गया. व्यक्तिगत स्तर पर वांगचुक के नौ बैंक खाते हैं, जिनमें से आठ छिपे हुए. 2021 से अब तक उन्होंने 2.3 करोड़ रुपये अज्ञात संस्थाओं को विदेश भेजे, जो मनी लॉन्ड्रिंग के शक को जन्म दे रहा है.
आरोप साबित हुए तो वांगचुक की साख को लग सकता है बट्टा
बीजेपी सूत्रों का कहना है कि वांगचुक कॉर्पोरेट जगत की आलोचना करते हैं, लेकिन उनकी संस्थाएं सरकारी पीएसयू से भारी सीएसआर फंड लेती हैं. यह आरोप साबित होने पर लद्दाखी आंदोलन की साख दांव पर लग सकती है. वांगचुक ने सीबीआई जांच को 'विच हंट' बताया है, लेकिन तथ्य साफ कहते हैं कि विदेशी फंडिंग के बिना सक्रियता का दावा खोखला साबित हो रहा है.
लद्दाख आंदोलन पर असर
यह जांच लद्दाख के हालिया हिंसा के ठीक बाद आई है, जहां चार लोग मारे गए. वांगचुक की संस्थाएं गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा देती हैं, लेकिन अनियमितताएं सामने आने से स्थानीय लोगों में भ्रम फैल रहा है. सीबीआई अभी लद्दाख में रिकॉर्ड खंगाल रही है, और कोई एफआईआर नहीं हुई है. क्या यह सच्ची मांगों को कमजोर कर देगा, या नई बहस छेड़ेगा?