सरकार इसी महीने के आखिर में संसद का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी कर रही है. इस विशेष सत्र में परिसीमन और लोकसभा व राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण लागू करने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पेश किए जा सकते हैं. सूत्रों के मुताबिक, सरकार को लोकसभा में इन विधेयकों को पारित कराने के लिए जरूरी संख्या होने का भरोसा है.
बताया जा रहा है कि सरकार इस मुद्दे पर डीएमके और कुछ छोटे विपक्षी दलों से भी बातचीत कर रही है. कोशिश है कि विधेयकों पर मतदान से पहले पर्याप्त समर्थन जुटाया जा सके. यह कवायद ऐसे समय हो रही है, जब विपक्ष मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सरकार पर लगातार हमला बोल रहा है.
दरअसल, बजट सत्र के दौरान 17 अप्रैल को परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा में जरूरी समर्थन नहीं मिल पाया था. इसके बाद अब सरकार इन प्रस्तावित बदलावों को दोबारा आगे बढ़ाने की तैयारी में है. सूत्रों के अनुसार, इस बार सरकार अपनी संख्या को लेकर ज्यादा आश्वस्त है.
संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त हुआ था, लेकिन अभी उसका औपचारिक सत्रावसान नहीं हुआ है. ऐसे में विशेष बैठक बुलाने का रास्ता खुला हुआ है. सरकार फिलहाल विशेष सत्र की तारीख और एजेंडा तय करने की प्रक्रिया में है.
सूत्रों के मुताबिक, सरकार डीएमके से भी संपर्क में है. यह बातचीत तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद डीएमके के कांग्रेस से अलग होने और इंडिया गठबंधन से बाहर निकलने के बाद शुरू हुई है. इसके अलावा कुछ छोटे विपक्षी दलों से भी समर्थन को लेकर बातचीत चल रही है. विशेष सत्र की तारीख तय करते समय 26 और 27 अक्टूबर को संविधान सदन में होने वाले 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच का भी ध्यान रखा जाएगा. सूत्रों के अनुसार, विशेष बैठक बुलाने से पहले करीब एक सप्ताह का नोटिस दिया जा सकता है.
परिसीमन का मुद्दा लोकसभा और विधानसभा सीटों के पुनर्निर्धारण से जुड़ा है, जबकि महिला आरक्षण विधेयक का उद्देश्य विधानसभाओं और लोकसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करना है. सरकार इन दोनों मुद्दों को एक साथ आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है.