भारत का आत्मनिर्भरता की ओर एक और कदम! GSL ने लॉन्च किया 'Samudra Prachet' प्रदूषण नियंत्रण पोत

गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) ने 23 जुलाई 2025 को अपना दूसरा स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत 'समुरा प्रचेत' लॉन्च किया. यह GSL द्वारा निर्मित दो प्रदूषण नियंत्रण पोतों में से अंतिम है. पहले पोत को 29 अगस्त 2024 को लॉन्च किया गया था और वह अब डिलीवरी के अंतिम चरण में है.

Princy Sharma

Pollution Control Vessel: गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) ने 23 जुलाई 2025 को अपना दूसरा स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत 'समुर प्रचेत' (Samudra Prachet) लॉन्च किया. यह पोत GSL द्वारा निर्मित दो प्रदूषण नियंत्रण पोतों की कक्षा का दूसरा और अंतिम पोत है. पहले प्रदूषण नियंत्रण पोत को 29 अगस्त 2024 को लॉन्च किया गया था और अब वह डिलीवरी के लास्ट स्टेज पर है.

इन प्रदूषण नियंत्रण पोत को पूरी तरह से स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित किया गया है, जो भारतीय तटरक्षक बल (ICG) की आवश्यकताओं को पूरा करते हैं. 'समुर प्रचेत' के लॉन्च के साथ, गोवा शिपयार्ड और भारतीय तटरक्षक बल आत्मनिर्भर भारत की दिशा में लगातार प्रगति कर रहे हैं, जिससे भारतीय रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर एक और कदम बढ़ाया गया है.

श्रीमती प्रियंवदा परमेश ने किया लॉन्च

लॉन्चिंग समारोह में प्रमुख अतिथि के रूप में श्रीमती प्रियंवदा परमेश ने पोत को लॉन्च किया, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमनी उपस्थित थे. समारोह में गोवा शिपयार्ड लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक श्री ब्रजेश कुमार उपाध्याय, तटरक्षक बल के वरिष्ठ अधिकारी और गोवा शिपयार्ड के कर्मचारी भी मौजूद थे.

यह प्रदूषण नियंत्रण पोत 114.5 मीटर लंबा, 16.5 मीटर चौड़ा और 4170 टन का है, जो अत्याधुनिक प्रतिक्रिया उपकरणों से लैस है.यह पोत तटरक्षक बल को हमारे समुंदर क्षेत्र में तेल फैलाव की घटनाओं पर त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया देने में मदद करेगा.

आत्मनिर्भरता को मिली मजबूती

इस परियोजना ने स्थानीय उद्योग और MSME को बड़े पैमाने पर रोजगार दिया है, जिससे गोवा में समुद्री उत्पादन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला है. इस परियोजना के माध्यम से भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को और मजबूती मिली है. तटरक्षक बल के महानिदेशक, परमेश शिवमनी ने इस अवसर पर गोवा शिपयार्ड की तारीफ करते हुए कहा कि यह पोत भारतीय तटरक्षक बल के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और यह स्वदेशी निर्माण की दिशा में एक बड़ी सफलता है.