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कहां से आता है दिल्ली का पानी; हरियाणा, हिमाचल से क्यों हो जाता है झगड़ा?

Delhi Water Supply: दिल्ली में पानी की कमी होते ही दिल्ली की सरकार हरियाणा पर आरोप लगती है. दिल्ली को मिलने वाले पानी में हरियाणा और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों का नाम आता है. क्या आप जानते हैं कि बार-बार ऐसा क्यों होता है?

PTI
India Daily Live

प्यास दिल्ली को लगती है और आरोप हरियाणा पर लगते हैं. मामला कोर्ट जाता है तो आदेश हिमाचल प्रदेश को मिलता है. दिल्ली की पानी की मांग बड़ी पुरानी है. पानी की इस जंग में यही तीन राज्य ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब भी हिस्सेदार बनते रहे हैं. मौजूदा समय में भी दिल्ली पानी के संकट से जूझ रही है. दिल्ली सरकार ने पानी की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो अदालत ने हिमाचल को आदेश दिए कि वह पानी छोड़े. ये पानी छोड़ने, ज्यादा पानी देने और पानी रोकने का गणित क्या है, इसको लेकर अक्सर लोग कनफ्यूज हो जाते हैं. आइए आज इसी कन्फ्यूजन को दूर किया जाए.

इसी शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश सरकार को आदेश दिए कि वह 137 क्यूसेक पानी छोड़े, ताकि दिल्ली का जल संकट खत्म हो सके. इससे पहले, दिल्ली सरकार ने आरोप लगाए थे कि हरियाणा की सरकार यमुना में आने वाले पानी को रोक रही है और उसका हिस्सा नहीं दे रही है. आइए समझते हैं कि राज्यों के बीच पानी का बंटवारा कैसे होता है और नदी के पानी पर किसका, कितना हक होता है.

दिल्ली को कहां से मिलता है पानी?

दिल्ली जैसे बड़े शहर में 2 करोड़ से ज्यादा लोग रहते हैं. इन लोगों तक पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी दिल्ली जल बोर्ड की है. इतना पानी दिल्ली के पास नहीं है. यही वजह है कि उसे यमुना नदी के अलावा, गंगा के साथ-साथ रावी-ब्यास से पानी मिलता है. कुछ पानी सीधे यमुना के जरिए आता है. बाकी का पानी अपर गंगा कनाल और अन्य नहरों के जरिए दिल्ली तक पहुंचता है. इन स्रोतों से दिल्ली को 470 क्यूसेक यानी लगभग 254 MGD पानी मिलता है.

हरियाणा की ओर से दिल्ली के लिए दो जलधाराएं आती हैं. यमुना नदी से पानी लाने वाली है करियर लाइन्ड चैनल (CLC) और रावी-ब्यास नदियों से पानी लाती है दिल्ली सब ब्रांच (DSB). CLC से 719 क्यूसेक और DSB से 330 क्यूसेक पानी आता है. इसके अलावा, दिल्ली से होकर बहने वाली यमुना से भी पानी लिया जाता है. नदियों के पानी के अलावा, दिल्ली जल बोर्ड जमीन से निकलने वाले पानी का भी इस्तेमाल करता है. इसके लिए पूरी दिल्ली में कई ट्यूबवेल और कुएं भी मौजूद हैं. इनके जरिए लगभग 135 MGD पानी की सप्लाई की जाती है.

क्यों आया पानी का संकट?

इस बार भीषण गर्मी में अचानक दिल्ली के पास पानी की कमी हो गई. 12 से 14 मई के बीच पहली बार और फिर 18 मई से 1 जून तक दिल्ली के वजीराबाद में स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में पानी की कमी हो गई. उसी दौरान तापमान अपने पीक पर था. ऐसे में पानी की मांग ज्यादा थी और सप्लाई कम होने लगी. 131 MGD क्षमता वाला वजीराबाद WTP दिल्ली के सात बड़े क्षेत्रों के साथ-साथ कई अन्य हिस्सों में भी पानी की सप्लाई करता है. दिल्ली के कुल 9 WTP में से यह तीसरा सबसे बड़ा सप्लायर है. इसमें मूल रूप से CLC और DSB से पानी आता है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इन दोनों से तो पर्याप्त पानी आ रहा था लेकिन नदी में पानी कम हो गया था.

दरअसल, 1 से 24 मई के बीच दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में न के बराबर बारिश हुई. इसका नतीजा यह हुआ कि यमुना नदी में ही पानी की कमी हो गई. एक अधिकारी ने बताया हिथिनी कुंड बैराज से छोड़े गए 353 क्यूसेक पानी का एक बड़ा हिस्सा सीपेज या फिर कड़ी धूप के कारण कम हो जाता है. 

कैसे बंटता है पानी?

हरियाणा, यूपी, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश यानी कुल 5 राज्य यमुना के पानी में हिस्सेदार हैं. इसके लिए 1994 में इन राज्यों के बीच समझौता हुआ था. इसमें तय हुआ था कि दिल्ली को मार्च से जून के बीच 0.076 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी मिलेगा. साल भर में दिल्ली को कुल 0.724 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी मिलेगा. यह बंटवारा अपर यमुना रीवर बोर्ड की देखरेख में होता है.