'अब ड्रोन तय करेंगे कौन मरेगा-कौन बचेगा, 5 सालों का भी वक्त नहीं', CIA के पूर्व निदेशक

पेट्रियस ने कहा कि दुनिया में युद्ध और तकनीक में इतनी तेजी से बदलाव हो रहा है कि आने वाले पांच सालों में सब कुछ बदलने वाला है.

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Sagar Bhardwaj

अमेरिकी इंटेलिजेंस एजेंसी CIA के पूर्व निदेशक जनरल डेविड पेट्रियस नई दिल्ली में आयोजित एनडीटीवी वर्ल्ड समिट में ड्रोन वॉरफेयर पर बेहद ही खुले तौर पर अपनी बात रखी. उन्होंने आने वाले वक्त में युद्ध की चुनौतियों और आधुनिक हथियारों के जरिए युद्ध के बदलते तरीकों पर भी बात की.

ड्रोन तय करेंगे और मरेगा, कौन बचेगा

बता दें कि ड्रोन युद्ध एक ऐसा मुद्दा है जिसका भारत सहित दुनिया के तमाम देश सामना कर रहे हैं. पेट्रियस ने कहा कि दुनिया में युद्ध और तकनीक में इतनी तेजी से बदलाव हो रहा है कि आने वाले पांच सालों में सब कुछ बदलने वाला है. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में ड्रोन ही तय करेंगे कि कौन जिंदा बचेगा और कौन मारा जाएगा. उन्होंने कहा कि युद्ध में मानवीय हस्तक्षेप बढ़ेगा लेकिन ग्राउंड पर सैनकों की संख्या में कमी आएगी.

डेविड पेट्रियस ने कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से जारी हाई-टेक युद्ध, युद्ध के तरीकों में आए सबसे बड़े बदलाव को दिखाता है. उन्होंने कहा कि अब दुनिया की हर सेना को यह समझने की जरूरत है कि अब क्रांतिकारी संस्थागत बदलाव लाना कितना जरूरी हो गया है.


उन्होंने कहा कि हाईटेक हथियारों के दम पर यूक्रेन में सीमा पर तैनात सैनिक ज्यादातर अंडरग्राउंड रहते हैं और निगरानी उपकरणों के जरिए बाहर की दुनिया पर नजर रखते हैं. उन्होंने कहा कि ड्रोन और स्मार्ट हथियारों ने रूस-यूक्रेन की जंग में सेना के काम करने के तरीके को पूरी तरह से बदल दिया है. दोनों देश के ड्रोन अब सैनिक या टैंक को अपनी मर्जी से निशाना बना रहे हैं.

सैनिकों को जरूरी सामान अब ट्रकों के बजाय दूर से कंट्रोल किए जाने वाले वाहनों और ड्रोनों के जरिए पहुंचाया जा रहा है. पेट्रियस ने कहा कि पारंपरिक सैन्य युद्धाभ्यास अब पुराने पड़ चुके हैं. पारंपरिक युद्ध रणनीति, टैंक, पैदल सेना, इंजीनियर, एयर डिफेंस, इलेक्ट्रिक वॉर...ये सब अब टिक नहीं सकते. ड्रोन आसानी से सारी चीजों को देखकर उन्हें उड़ा सकता है.

रूस-यूक्रेन युद्ध से सबक लेने की जरूरत

उन्होंने कहा कि दुनिया भर की सेनाओं को रूस-यूक्रेन युद्ध से सबक लेने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि रूस और यूक्रेन के अलावा दुनिया का ऐसा कोई देश नहीं है जो इस काम को उस रफ्तार से कर रहा हो जिसकी जरूरत है.

पेट्रियस ने कहा कि सेना को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए अभी से बदलाव शुरू करना होगा. जब उनसे पूछा गया कि अगर आपको एक सेना को आधुनिक करने के लिए पांच साल दिए जाएं तो आप क्या करेंगे? इस पर उन्होंने कहा, 'सबसे पहले में यही कहूंगा कि यह काम पांच साल में नहीं एक साल में किया जाएगा क्योंकि हमारे पास पांच साल का वक्त नहीं है.'

उन्होंने साफ तौर पर कहा कि केवल अलग-अलग तरह के ड्रोन खरीदना ही काफी नहीं, उन्हें चलाने वाले सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर को भी जरूरत के अनुसार, लगातार अपडेट करने में भी हमें सक्षम होना होगा.

भारत को लेकर उन्होंने जो बात कही वह भारतीयों को चिंता में डाल सकती है. उन्होंने कहा कि यह रफ्तार भारत जैसे देशों में हथियारों की खरीद प्रक्रिया से बिल्कुल अलग है, जहां किसी हथियार के सिस्टम को चुनने में ही कई साल लग जाते हैं.

अब मशीनें लेंगी फैसला

पेट्रियस ने साफ तौर पर कहा कि अब युद्ध के मैदान में मशीनें और ड्रोन ही यह तय करेंगे कि कौन बचेगा और कौन मरेगा. उन्होंने कहा कि इस ऑटोनॉमस सिस्टम पर अभी प्रयोग चल रहे हैं लेकिन इस साल के आखिर तक या अगले साल तक इनकी तादाद काफी बढ़ जाएगी.

ड्रोन ने रूस से नौसैनिकों को चटाई धूल

युद्ध के मैदान में ड्रोन कितने महत्वपूर्ण हो गए हैं, इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यूक्रेन ने ड्रोन के माध्यम से रूस के ब्लैक सी फ्लीट को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया, जबकि यूक्रेन के पास अपनी कोई खास नौसेना नहीं है.

पेट्रियस ने कहा कि यूक्रेन ने रूस के ब्लैक सी फ्लीट के एक-तिहाई से ज्यादा जहाजों को डुबो दिया. इस तकनीक में हवाई ड्रोन जहाजों को खोजते हैं और समुद्री डोन उन जहाजों को डुबा देते हैं. उन्होंने कहा कि रूस के जहाज अब बंदरगाहों पर ही सिमट कर रह गए हैं क्योंकि खुले समुद्र में उनके लिए टिक पाना मुश्किल हो रहा है. उन्होंने बताया कि यूक्रेन ने क्रीमिया को सप्लाई पहुंचाने वाले करीब 300 जहाजों को डुबो दिया और अपने बॉर्डर से तीन हजार किलोमीटर के दायरे में आने वाली रिफाइनरी पर हमला कर उन्हें नष्ट कर दिया.