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पहले पानी कम, अब बिजली का गम, आखिर क्यों दिल्ली के सामने आ रहे संकट पर संकट?

Delhi Water and Electricity Crisis: दिल्ली इन दिनों बिजली और पानी की किल्लत से जूझ रही है. जहां पिछले कई दिनों से पानी के टैंकर्स के पीछे लाइन में खड़े हो रहे लोगों की तस्वीरों ने दिल्ली को बेचैन कर रखा है तो वहीं मंगलवार को दिल्ली के कई इलाकों में बिजली गुल होने की खबर ने भी परेशान कर दिया. आखिर ऐसा क्या हो रहा है जिसके चलते दिल्ली को पहले पानी और अब बिजली की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है.

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Delhi Water and Electricity Shortage
Courtesy: IDL

Delhi Water and Electricity Crisis: दिल्ली इन दिनों दोहरी मार झेल रही है. एक तरफ बिजली की कटौती ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है, तो दूसरी तरफ पानी की किल्लत भी बनी हुई है. इन दोनों मुद्दों ने राजधानीवासियों का जीना मुहाल कर रखा है. जहां एक ओर दिल्ली के लगातार मुश्किलों का सामना करने के पीछे आम आदमी पार्टी के फॉलोअर्स केंद्र सरकार की साजिश करार दे रहे हैं तो वहीं पर बीजेपी इसे आप सरकार का मिसमैनेजमेंट और दिल्ली जल बोर्ड के साथ मिलकर किया जाने वाले भ्रष्टाचार बताया है.

आखिर क्यों दिल्ली की हो रही बिजली गुल?

मंगलवार को दोपहर 2.11 बजे के बाद से दिल्ली के कई इलाकों में अचानक अंधेरा छा गया. ये कटौती उत्तर प्रदेश के माण्डोला में स्थित पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (PGCIL) के सब-स्टेशन में लगी आग के कारण हुई. दरअसल, दिल्ली को 1200 मेगावाट बिजली माण्डोला सब-स्टेशन से ही मिलती है. सब-स्टेशन में लगी आग से राजधानी के कई इलाकों की बिजली आपूर्ति ठप पड़ गई.

दिल्ली की बिजली मंत्री आतिशी ने सोशल मीडिया पर स्थिति का अपडेट देते हुए बताया कि "बिजली बहाली का काम शुरू हो चुका है और अलग-अलग इलाकों में धीरे-धीरे बिजली लौट रही है." हालांकि उन्होंने इस बड़े पैमाने पर बिजली की कटौती को "बहुत चिंताजनक" बताया.

पावर ग्रिड में खामी से चिंता में आतिशी

उन्होंने आगे कहा कि "लेकिन राष्ट्रीय पॉवर ग्रिड में यह बड़ी खामी बहुत चिंताजनक है. मैं केंद्रीय बिजली मंत्री और PGCIL के अध्यक्ष से मुलाकात का समय मांग रही हूं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऐसी स्थिति दोबारा न बने."

एक्सपर्ट्स के अनुसार उनकी मांग जायज है क्योंकि राष्ट्रीय स्तर पर बिजली आपूर्ति में खामियां दिल्ली जैसे महानगरों के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकती हैं.

दिल्ली की हर संभव मदद करेगा हरियाणा?

दिल्ली जल संकट से भी जूझ रही है. इस मुद्दे पर दिल्ली और हरियाणा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है. मंगलवार को दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने बताया कि उन्होंने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से बातचीत की है. सक्सेना ने कहा कि नायब सिंह ने उन्हें मौसम के कारण हरियाणा पर पानी की आपूर्ति को लेकर लगी पाबंदियों के बावजूद हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है.

उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बताया कि "कल हरियाणा के माननीय मुख्यमंत्री नायब सिंह जी से बात हुई. उन्होंने दोहराया कि दिल्ली को आवंटित हिस्से के अनुसार पानी दिया जा रहा है और राज्य की अपनी बाधाओं के बावजूद हरसंभव मदद का आश्वासन दिया."

हरियाणा से मिल रहा पानी पर रास्ते में हो जा रहा चोरी?

हालांकि, दिल्ली जल मंत्री  आतिशी का आरोप है कि हरियाणा सरकार मुनाक नहर से पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं छोड़ रही है. मुनाक नहर ही दिल्ली के सात जल शोधन संयंत्रों को पेयजल आपूर्ति के लिए जरूरी पानी मुहैया कराती है. सप्ताह के अंत में  आतिशी ने हरियाणा के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इसी मुद्दे को उठाया था. वहीं हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था.

इसके बाद सोमवार को  आतिशी, उनके कैबिनेट सहयोगी सौरभ भारद्वाज और उपराज्यपाल वीके सक्सेना के बीच बैठक हुई थी, लेकिन यह बैठक भी दिल्ली को मिलने वाले पानी की मात्रा को लेकर आरोप-प्रत्यारोप में ही उलझकर रह गई. इस बैठक में अधिकारियों ने एलजी को बताया कि हरियाणा की तरफ से तय मात्रा (1050 क्यूसेक) से ज्यादा पानी (1161 क्यूसेक) मूनक नहर में छोड़ा जा रहा है लेकिन बवाना आने तक यह पानी 20 प्रतिशत (960.78 क्यूसेक) तक कम हो रहा है.

आम तौर पर यह घटाव महज 5 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होना चाहिए लेकिन 20 प्रतिशत तक पानी कहां जा रहा है इसका पता लगाना बेहद जरूरी है. दिल्ली की बिजली कटौती और पानी की किल्लत जल्द खत्म हो और केंद्र एवं राज्य सरकारें इस ज्वलंत मुद्दे को आपस में मिल बैठकर सुलझाएं, यही उम्मीद है.