FCRA बिल पर अमित शाह संभालेंगे मोर्चा, संसद में आर-पार की तैयारी; किस बात से डर रही है कांग्रेस?
मानसून सत्र के अंतिम सप्ताह में एफसीआरए संशोधन विधेयक को लेकर संसद में टकराव के आसार हैं. सरकार चर्चा के लिए तैयार है, जबकि कांग्रेस ने अपने सांसदों को व्हिप जारी कर रणनीतिक तैयारी तेज कर दी है.
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र का अंतिम सप्ताह राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है. एफसीआरए संशोधन विधेयक को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं. एक ओर सरकार इसे सदन में आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है, तो दूसरी ओर कांग्रेस ने अपने सांसदों की पूरी मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए रणनीति तेज कर दी है.
एफसीआरए विधेयक पर सरकार की रणनीति
सरकारी तैयारियों के बीच केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ हुई बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने भी संकेत दिया है कि विदेशी अंशदान (विनियमन) कानून से जुड़ा संशोधन विधेयक 12 अगस्त को लोकसभा में पेश किया जा सकता है. माना जा रहा है कि इस विषय पर चर्चा की कमान स्वयं अमित शाह संभालेंगे और विपक्ष द्वारा उठाए जाने वाले सवालों का जवाब भी देंगे.
कांग्रेस ने बढ़ाई राजनीतिक सक्रियता
सरकार की संभावित रणनीति को देखते हुए कांग्रेस ने सोमवार, मंगलवार और बुधवार के लिए अपने सभी सांसदों को संसद में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का व्हिप जारी किया है. पार्टी ने इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों से भी अपने सांसदों की उपस्थिति सुनिश्चित करने का आग्रह किया है. हालांकि भाजपा ने औपचारिक व्हिप जारी नहीं किया है, लेकिन अपने सांसदों को दिल्ली में रहने के निर्देश दिए हैं, जिससे सदन में संख्या बल को लेकर दोनों पक्ष पूरी तरह सतर्क नजर आ रहे हैं.
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महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर आशंका
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि कांग्रेस की सबसे बड़ी चिंता केवल एफसीआरए संशोधन विधेयक नहीं है. पार्टी को आशंका है कि सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े किसी संविधान संशोधन विधेयक को भी अचानक सदन में ला सकती है. ऐसे विधेयक को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत आवश्यक होता है, इसलिए विपक्ष अपने किसी भी सांसद की अनुपस्थिति का जोखिम नहीं लेना चाहता. इसी कारण कांग्रेस ने पहले से ही व्यापक तैयारी शुरू कर दी है.
विदेशी प्रतिक्रियाओं पर भी सरकार की नजर
एफसीआरए संशोधन को लेकर विदेशों, विशेषकर अमेरिका में उठ रही आपत्तियों पर भी सरकार सक्रिय दिखाई दे रही है. हाल ही में एक अमेरिकी सांसद ने इस प्रस्तावित कानून को लेकर आलोचनात्मक टिप्पणी की थी. इसी पृष्ठभूमि में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमित शाह की बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. सरकार का कहना है कि भारतीय मिशन विभिन्न देशों में इस विधेयक से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट करेंगे. साथ ही सरकार ने ईसाई संगठनों के प्रतिनिधियों से बातचीत कर उनकी आशंकाओं को दूर करने का भी प्रयास किया है.