AI और छंटनी के दौर में बदल रहा करियर का खेल, अब एक नौकरी नहीं ‘पोर्टफोलियो करियर’ पर भरोसा
AI और तेजी से बदलती नौकरियों के दौर में एक ही कंपनी के साथ पूरी जिंदगी बिताने का पुराना करियर मॉडल बदल रहा है. युवा अब कई स्किल्स, आय के स्रोत और अनुभवों वाला पोर्टफोलियो करियर अपना रहे हैं.
कभी एक कंपनी में लंबे समय तक काम करना करियर की स्थिरता और सफलता की निशानी माना जाता था. अब AI, छंटनी और तेजी से बदलती स्किल्स ने इस सोच को चुनौती दी है. युवा प्रोफेशनल्स नौकरी के साथ नई क्षमताएं सीख रहे हैं, फ्रीलांस काम कर रहे हैं और आय के अतिरिक्त रास्ते बना रहे हैं.
क्यों बदल रही है नौकरी के प्रति सोच?
कॉर्पोरेट दुनिया में अब स्थायी नौकरी की गारंटी पहले जैसी नहीं रही. Oracle और Adidas जैसी कंपनियों में हुई छंटनियों ने भी इस बदलाव को सामने रखा है. वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की Future of Jobs Report 2025 के मुताबिक 2030 तक करीब 39% मौजूदा स्किल्स बदल सकती हैं या अप्रासंगिक हो सकती हैं. ऐसे में सिर्फ एक नौकरी और एक स्किल पर निर्भर रहना जोखिम बढ़ा सकता है.
युवा बना रहे हैं अपना ‘स्किल पोर्टफोलियो’
डेलॉयट के 2025 Gen Z और Millennial Survey के अनुसार, केवल 6% Gen Z उत्तरदाताओं ने वरिष्ठ नेतृत्व तक पहुंचना अपना प्राथमिक करियर लक्ष्य बताया. भारत में 85% Gen Z ने हर सप्ताह नई चीजें सीखने की बात कही, जबकि 94% ने लगातार सीखने को करियर विकास के लिए महत्वपूर्ण माना. अब पहचान केवल जॉब टाइटल से नहीं, बल्कि इस बात से बन रही है कि व्यक्ति क्या जानता है और क्या कर सकता है.
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साइड इनकम और क्रिएटर इकोनॉमी का बढ़ता असर
नौकरी के साथ फ्रीलांसिंग, कंटेंट क्रिएशन, ऑनलाइन टीचिंग और छोटे बिजनेस जैसे विकल्प तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं. Indeed Hiring Lab के आंकड़ों के मुताबिक भारत में क्रिएटर से जुड़ी नौकरियों की पोस्टिंग 2020 से 2026 के बीच 919% बढ़ी. LinkedIn के भारतीय डेटा में प्रोफाइल पर ‘Founder’ जोड़ने वालों में सालाना 104% वृद्धि भी इस बदलाव की ओर इशारा करती है.
मूनलाइटिंग से ‘पोर्टफोलियो करियर’ तक
मूनलाइटिंग को लेकर कंपनियों की चिंताएं भी हैं, खासकर गोपनीयता, बौद्धिक संपदा और हितों के टकराव को लेकर. लेकिन नई बहस सिर्फ दूसरी नौकरी करने तक सीमित नहीं है. विचार यह है कि कर्मचारी अपनी मुख्य नौकरी के साथ ऐसी स्किल्स विकसित करें जो भविष्य में नए अवसर दे सकें. इस मॉडल में कंपनी नौकरी का हिस्सा होती है, पूरी पेशेवर पहचान नहीं. AI के दौर में करियर सिक्योरिटी का मतलब एक जगह टिके रहना नहीं, बल्कि खुद को लगातार प्रासंगिक बनाए रखना बनता जा रहा है.