कर्तव्य पथ पर दिखी भारत-यूरोप की जुगलबंदी; यूरोप के दो दिग्गजों की गणतंत्र दिवस पर यात्रा को लेकर PM मोदी ने दिया खास संदेश

गणतंत्र दिवस पर भारत पहुंचे यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-ईयू साझेदारी को मजबूत बताया. दौरे के दौरान व्यापार, एफटीए और साझा मूल्यों पर चर्चा होगी.

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Anuj

नई दिल्ली: भारत में 77वां गणतंत्र दिवस धूमधाम से मनाया जा रहा है. इस भव्य समारोह में यूरोपीय संघ के शीर्ष नेता भी शामिल हुए. 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में यूरोपीय संघ की मजबूत मौजूदगी ने नई कूटनीतिक ऊर्जा भर दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा की भारत यात्रा को अहम बताया है.

यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब भारत और यूरोपीय संघ लंबे समय से लंबित मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.

पीएम मोदी का स्वागत संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि गणतंत्र दिवस के अवसर पर यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी भारत के लिए सम्मान की बात है. उन्होंने कहा कि यह यात्रा भारत और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ती साझेदारी और साझा मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है. पीएम मोदी के अनुसार, यह दौरा दोनों पक्षों के बीच सहयोग को नई गति देगा. 

16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा 27 जनवरी तक भारत में रहेंगे. इस दौरान दोनों नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करेंगे. इसके अलावा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी उनकी मुलाकात प्रस्तावित है.

शिखर सम्मेलन का एजेंडा

16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन में सबसे अहम मुद्दा मुक्त व्यापार समझौता रहेगा. यह समझौता लंबे समय से बातचीत के दौर में है. माना जा रहा है कि 27 जनवरी को इस पर बड़ी घोषणा हो सकती है. बैठक में व्यापार, निवेश, तकनीक और वैश्विक चुनौतियों पर भी चर्चा होगी.

एफटीए से किन क्षेत्रों को लाभ

प्रस्तावित भारत-ईयू एफटीए में वस्त्र, जूते और अन्य श्रम आधारित क्षेत्रों पर आयात शुल्क घटाने की उम्मीद है. इसके अलावा कारों और वाइन पर भी शुल्क में कटौती शामिल हो सकती है. समझौते के तहत सेवा क्षेत्रों में नियमों को उदार बनाने की संभावना है, जिससे दोनों पक्षों को लाभ मिल सकता है.

मौजूदा टैरिफ की स्थिति

फिलहाल, यूरोपीय संघ में भारतीय उत्पादों पर औसतन 3.8 प्रतिशत टैरिफ लगता है, जबकि श्रम आधारित उत्पादों पर यह करीब 10 प्रतिशत है. वहीं, भारत में यूरोपीय उत्पादों पर औसत शुल्क 9.3 प्रतिशत है. ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स पर 35.5 प्रतिशत तक शुल्क लगाया जाता है, जो एफटीए के तहत कम हो सकता है.