हाथी को भगाने के लिए आग के गोले और रॉड का किया इस्तेमाल, बेजुबान की चली गई जान
Elephant: कोलकाता में हाथियों झुंड़ को भगाने के लिए नुकीली छड़ों और आग के गोले का इस्तेमाल किया गया. इस दौरान दो हाथी घायल हो गए. इलाज के दौरान शनिवार की सुबह एक हाथी ने दम तोड़ दिया.
Elephant: जंगली जानवरों को भगाने के लिए नुकीली छड़ों और आग के गोले का इस्तेमाल करना बैन है. लेकिन गुरुवार को पश्चिम बंगाल एक गांव वालों ने हाथियों को भगाने के लिए आग के गोले का इस्तेमाल किया, जिसके चलते बेजुबान की जान चली गई. एनिमल प्रोटेक्टर प्रेरणा सिंह बिंद्रा ने शनिवार दोपहर एक ऑनलाइन पोस्ट में इस घटना के बारे में जानकारी दी.
गुरुवार की सुबह 6 हाथी राज कॉलेज कॉलोनी में घुस आए और कुछ दीवारें तोड़ दीं. कुछ घंटों के बाद हाथी के एक झुंड ने एक बुजुर्ग व्यक्ति को मार डाला. हाथी के झुंड ने जब उत्पात मचाना शुरू किया तो उन्हें भगाने के लिए लोहे की छड़ों और जलती हुई मशालों का इस्तेमाल किया गया.
एनिमल प्रोटेक्टर प्रेरणा सिंह ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी
एनिमल प्रोटेक्टर प्रेरणा सिंह ने दावा किया कि स्थानीय लोगों ने संकेत दिया कि हुल्ला टीम वन विभाग की पूरी जानकारी के साथ काम कर रही थी. हुल्ला टीम वह जिसने हाथियों के झुंड को भगाने के लिए लोहे की छड़ और आग के गोले का इस्तेमाल किया.
घायल हाथी को उपचार के लिए देर रात वन विभाग की टीम ले गई. घायल होने के 8 घंटे की देरी के बाद हाथी को उपचार के लिए ले जाया गया था. शनिवार की सुबह इलाज के दौरान हाथी ने दम तोड़ दिया.
एनिमल प्रोटेक्टर प्रेरणा सिंह ने अपनी पोस्ट में बताया कि इस दौरान एक अन्य हाथी गंभीर रूप से घायल हुआ. वह खड़ा होने में असमर्थ था, उसे बुलडोजर की मदद से जंगल में धकेला जा रहा था.
सुप्रीम कोर्ट नुकीली छड़ों और आग के गोले पर लगा चुका है प्रतिबंध
हुल्ला टीम लोगों का ऐसा समूह है जो खेतों से हाथियों को भगाने का काम करते हैं. पश्चिम बंगाल में व्यापक रूप से देखी जाने वाली इन हुल्ला पार्टियों द्वारा नुकीली छड़ों का इस्तेमाल करने और आग के गोले फेंकने की प्रथा पर सुश्री बिंद्रा और अन्य कार्यकर्ताओं द्वारा दायर एक जनहित याचिका के बाद 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिबंध लगा दिया था.