CJI सूर्यकांत की टिप्पणी के बाद Form 6 पर चुनाव आयोग की सफाई, जानें क्या कहा?
CJI सूर्यकांत की टिप्पणी के बाद चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि नए मतदाताओं के Form 6 में बदलाव नहीं हुआ. SIR से जुड़ी घोषणा अलग दस्तावेज थी.
नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद चुनाव आयोग ने सोमवार को स्थिति स्पष्ट की. आयोग के सूत्रों ने कहा कि Form 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है. उनके अनुसार, Special Intensive Revision (SIR) से जुड़ी घोषणा Form 6 का संशोधित हिस्सा नहीं, बल्कि एक अतिरिक्त दस्तावेज था.
CJI ने क्या कहा था
सोमवार को सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने Form 6 के किसी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी है. CJI ने कहा कि जब संबंधित रिकॉर्ड अदालत के सामने आएंगे, तब वह देखना चाहेगी कि Form 6 में बदलाव किसने किया.
सुप्रीम कोर्ट में यह सुनवाई CEC ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग और चुनाव आयोग के कथित तौर पर अन्य दो आयुक्तों की मंजूरी के बिना फैसले लेने से जुड़ी याचिकाओं पर हो रही थी.
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आयोग ने कहा- फॉर्म में संशोधन नहीं हुआ
चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक, Form 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया था. SIR के दौरान इस्तेमाल की गई घोषणा को अतिरिक्त दस्तावेज के तौर पर जोड़ा गया था. आयोग का कहना है कि यह घोषणा SIR प्रक्रिया से संबंधित थी और इसे Form 6 में औपचारिक संशोधन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.
बिहार SIR के फैसले का दिया हवाला
आयोग ने बिहार में हुए SIR का भी हवाला दिया. सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 को सर्वसम्मति से बिहार SIR को बरकरार रखा था. अदालत ने माना था कि सामान्य मतदाता सूची संशोधन से अलग प्रक्रिया अपनाने मात्र से SIR असंवैधानिक नहीं हो जाता.
26 सितंबर को चुनाव आयोग ने भी कहा था कि Form 6 से जुड़ी SIR घोषणा को बिहार SIR पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले में बरकरार रखा गया था.
SIR घोषणा में क्या जानकारी मांगी गई
अतिरिक्त घोषणा के तहत नए आवेदकों से ऐसी जानकारी मांगी जाती थी, जिससे उनका, उनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पहले की गहन मतदाता सूची में दर्ज होने से संबंध स्थापित किया जा सके. यह व्यवस्था SIR प्रक्रिया के तहत लागू की गई थी.
SIR पूरी होने वाले राज्यों में घोषणा हटाई गई
30 सितंबर को चुनाव आयोग ने घोषणा की कि जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR पूरा हो चुका है, वहां ऑनलाइन Form 6 से अतिरिक्त SIR घोषणा हटा दी गई है. इन जगहों पर अब नए मतदाताओं को Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित मूल Form 6 ही भरना होगा.
वहीं, जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR अभी जारी है, वहां ECINET पोर्टल पर यह अतिरिक्त घोषणा उपलब्ध रहेगी.
26 सितंबर की बैठक में लिया गया फैसला
अतिरिक्त घोषणा हटाने का फैसला 26 सितंबर को हुई पूर्ण चुनाव आयोग की बैठक के बाद सामने आया. इस बैठक में CEC ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी शामिल थे. आयोग ने कहा था कि यह घोषणा SIR के लिए थी और गैर-SIR अवधि में Registration of Electors Rules, 1960 के तहत लागू फॉर्म ही इस्तेमाल किए जाएंगे.
दो चुनाव आयुक्तों ने जताई थी आपत्ति
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने Form 6 में अतिरिक्त SIR घोषणा जोड़ने को लेकर आपत्ति जताई थी. उनका तर्क था कि वैधानिक Form 6 में बदलाव करने के लिए Registration of Electors Rules, 1960 में निर्धारित प्रक्रिया का पालन जरूरी है.
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आयुक्तों ने यह भी चिंता जताई कि ऑनलाइन Form 6 में अतिरिक्त घोषणा शामिल होने से पहली बार मतदान करने वाले युवाओं को परेशानी हो सकती है, खासकर उन लोगों को जिनके माता-पिता या दादा-दादी के नाम पुरानी मतदाता सूचियों में नहीं थे.
विवाद का केंद्र अब रिकॉर्ड
चुनाव आयोग मूल Form 6 में किसी संशोधन से इनकार कर रहा है, जबकि याचिकाओं में अतिरिक्त घोषणा को Form 6 में बदलाव के तौर पर चुनौती दी गई है. सुप्रीम कोर्ट अब संबंधित रिकॉर्ड और आयोग के जवाब के आधार पर यह देखेगा कि यह व्यवस्था किस प्रक्रिया के तहत लागू की गई और इसके पीछे वैधानिक आधार क्या था.