Commonwealth Games 2026

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी को मिली शिक्षा मंत्रालय की कमान

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार प्रह्लाद जोशी को सौंप दिया है. राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर यह फैसला मंजूर किया, जबकि जोशी अपने मौजूदा मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी निभाते रहेंगे.

social media
Kuldeep Sharma

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय में बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए प्रह्लाद जोशी को इसकी जिम्मेदारी सौंप दी है. धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार होने के बाद राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर उन्हें अतिरिक्त प्रभार दिया. यह फैसला ऐसे समय आया है, जब NEET-UG परीक्षा को लेकर देशभर में छात्र आंदोलन और राजनीतिक बहस लगातार जारी रही.

धर्मेंद्र प्रधान के बाद प्रह्लाद जोशी को मिली नई जिम्मेदारी

धर्मेंद्र प्रधान के पद छोड़ने के बाद शिक्षा मंत्रालय की कमान अब प्रह्लाद जोशी के हाथों में आ गई है. राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, प्रधानमंत्री की सलाह पर उन्हें शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है. हालांकि, उनके पास पहले से मौजूद मंत्रालयों की जिम्मेदारियां भी पहले की तरह बनी रहेंगी. यानी वह अपने मौजूदा विभागों का काम संभालने के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय के प्रशासनिक और नीतिगत फैसलों की जिम्मेदारी भी निभाएंगे. सरकार ने यह कदम मंत्रालय के कामकाज में निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया है.

NEET-UG विवाद से तेज हुई राजनीतिक हलचल

इस बदलाव की पृष्ठभूमि में NEET-UG 2026 परीक्षा से जुड़ा विवाद अहम माना जा रहा है. 3 मई 2026 को परीक्षा के बाद पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोप सामने आए, जिसके बाद कई छात्रों ने परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठाए. धीरे-धीरे यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर के छात्र आंदोलन में बदल गया. इसी दौरान 15 मई को एक सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक टिप्पणी चर्चा का विषय बनी. बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी सामान्य छात्रों के लिए नहीं, बल्कि फर्जी डिग्री के सहारे पेशे में आने वाले लोगों के संदर्भ में थी.


आंदोलन ने बढ़ाया सरकार पर दबाव

28 जून 2026 को सोनम वांगचुक भी इस आंदोलन से जुड़े और जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की. उन्होंने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने की मांग उठाई. लंबे अनशन के कारण उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया. बाद में सरकार से बातचीत और लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त किया. इसके बाद 20 जुलाई को CJP ने जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकाला, जहां पुलिस के साथ टकराव हुआ. 22 जुलाई को राहुल गांधी ने भी प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन कर सरकार से जवाब मांगा.

नई जिम्मेदारी के साथ बड़ी चुनौती

25 जुलाई 2026 को धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंप दिया, जिसे तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया गया. इसके बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया, जबकि CJP ने भी अपना आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की. अब प्रह्लाद जोशी के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी परीक्षा प्रणाली पर छात्रों का भरोसा दोबारा कायम करना, पारदर्शिता सुनिश्चित करना और भविष्य में ऐसी विवादित परिस्थितियों को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाना होगी. शिक्षा मंत्रालय के सामने आने वाले दिनों में कई अहम फैसलों की चुनौती रहेगी.