साधना ग्रुप के चेयरमैन पर कसा शिकंजा, 168 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार
ED ने साधना ग्रुप के चेयरमैन राकेश कुमार गुप्ता को कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया है. जांच का संबंध दिवाला प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और एक मीडिया कंपनी से जुड़े वित्तीय लेनदेन से है.
मीडिया कारोबार से जुड़े एक बड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने साधना ग्रुप के चेयरमैन राकेश कुमार गुप्ता को गिरफ्तार किया है. अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई कथित मनी लॉन्ड्रिंग और दिवाला प्रक्रिया में अनियमितताओं की जांच के तहत की गई. 63 वर्षीय गुप्ता को शुक्रवार रात करीब 10:25 बजे दिल्ली में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के प्रावधानों के तहत हिरासत में लिया गया. इसके बाद उन्हें अदालत के सामने पेश किया गया.
ED हिरासत में भेज दिया
शनिवार तड़के करीब दो बजे गुप्ता को गाजियाबाद में पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह ललेर के आवासीय शिविर कार्यालय में पेश किया गया. अदालत ने उन्हें पांच दिन की ED हिरासत में भेज दिया. जांच एजेंसी ने सात दिन की हिरासत मांगी थी. यह मामला दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की सितंबर में दर्ज FIR से जुड़ा है, जिसमें साधना मीडिया प्राइवेट लिमिटेड (SMPL) की दिवाला प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं.
110 करोड़ रुपये के बकाये को लेकर क्या है आरोप?
पुलिस की शिकायत के अनुसार, आरोप है कि SMPL की दिवाला प्रक्रिया को इस तरह आगे बढ़ाया गया कि आयकर विभाग का 110.10 करोड़ रुपये का बकाया महज 20 लाख रुपये में निपटा दिया गया. शिकायत में दावा किया गया है कि इस प्रक्रिया में संबंधित लेनदारों की भूमिका अहम थी, जिनके पास लेनदारों की समिति (CoC) में 99.41 प्रतिशत हिस्सेदारी थी. ये आरोप जांच का हिस्सा हैं और अदालत में इनकी अंतिम पुष्टि होना बाकी है.
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क्रिप्टो और हवाला के जरिए रकम लेने का दावा
शिकायत में गुप्ता पर SMPL और आर्यन टीवी की दोबारा बिक्री से जुड़े लेनदेन में दो करोड़ रुपये से अधिक नकद हासिल करने का भी आरोप है. यह रकम कथित तौर पर क्रिप्टोकरेंसी या हवाला के जरिए प्राप्त की गई. इसके अलावा, SMPL से संबंधित लेनदारों को 4.48 करोड़ रुपये दिए जाने का आरोप लगाया गया है. इसमें गुप्ता की कंपनी शार्पलाइन ब्रॉडकास्ट को 2.99 करोड़ रुपये भुगतान किए जाने की बात भी शामिल है.
सेबी के आदेश और 168 करोड़ रुपये की जांच
ED ने अदालत को बताया कि इस मामले में कथित अपराध से अर्जित रकम करीब 168 करोड़ रुपये है. जांच में सेबी के मई 2025 के आदेश का भी हवाला दिया गया. शिकायत के मुताबिक, सेबी ने साधना ब्रॉडकास्ट के शेयरों में कथित हेरफेर के मामले में गुप्ता को जिम्मेदार ठहराया था और करीब 58 करोड़ रुपये की देनदारी से जुड़ा आदेश दिया था. हालांकि, बचाव पक्ष ने अदालत में कहा कि सेबी का जुर्माना भरा जा चुका है और आयकर विभाग से बकाया न होने का प्रमाणपत्र भी मिला था.
अदालत ने जांच रोकने की दलील क्यों नहीं मानी?
बचाव पक्ष ने दलील दी कि सेबी या आयकर विभाग की ओर से गुप्ता के खिलाफ शिकायत नहीं की गई, इसलिए ED की कार्रवाई पर सवाल उठता है. अदालत ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया. उसके मुताबिक, संबंधित विभागों की शिकायत न होने मात्र से ED की जांच अवैध नहीं हो जाती. अदालत ने यह भी कहा कि मामले में सरकारी खजाने को 100 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान का आरोप है, इसलिए जांच जरूरी है. अदालत के अनुसार, कथित लेनदेन बैंकिंग व्यवस्था से बाहर हुए और जब्त उपकरणों के डेटा की जांच अभी बाकी है.