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India Daily

दिल्ली NCR के बाद लेह लद्दाख में तेज भूकंप से दहला इलाका, 5.7 तीव्रता के झटकों के बाद अलर्ट

लेह लद्दाख क्षेत्र में रविवार को 5.7 तीव्रता का तेज भूकंप आया. झटके उत्तर पश्चिमी कश्मीर और आसपास के इलाकों में महसूस किए गए. फिलहाल किसी नुकसान या हताहत की खबर नहीं है. सरकार और एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं.

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Edited By: Babli Rautela
दिल्ली NCR के बाद लेह लद्दाख में तेज भूकंप से दहला इलाका, 5.7 तीव्रता के झटकों के बाद अलर्ट
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: लेह लद्दाख में रविवार को तेज भूकंप के झटकों से लोग दहशत में आ गए हैं. नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के अनुसार भूकंप की तीव्रता 5.7 मापी गई है. इसका केंद्र उत्तर पश्चिमी कश्मीर क्षेत्र में बताया गया है. लेह लद्दाख और कश्मीर का यह इलाका भूकंपीय रूप से बेहद संवेदनशील हिमालयी बेल्ट का हिस्सा है. भूकंप के झटके कुछ सेकंड तक महसूस किए गए जिससे लोग घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए. हालांकि राहत की बात यह रही कि अब तक किसी के घायल होने या संपत्ति के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है.

अधिकारियों ने बताया कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है. संभावित आफ्टरशॉक्स को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है. आपदा प्रबंधन से जुड़ी टीमों को भी अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके.

सरकार ने जारी की एडवाइजरी

भूकंप के बाद सरकार की ओर से सावधानी एडवाइजरी जारी की गई है. लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन के निर्देशों का पालन करें. कमजोर और पुराने भवनों से दूर रहने की सलाह भी दी गई है. यह भूकंप ऐसे समय पर आया है जब एक दिन पहले ही अफगानिस्तान में 4.1 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था. इससे पूरे क्षेत्र में बढ़ी हुई भूकंपीय गतिविधि की ओर इशारा मिलता है.

हाल के दिनों में कई भूकंप

नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के आंकड़ों के मुताबिक अफगानिस्तान में 15 जनवरी को 96 किलोमीटर की गहराई पर 4.2 तीव्रता का भूकंप आया था. इससे पहले 14 जनवरी को 90 किलोमीटर की गहराई पर 3.8 तीव्रता का एक और भूकंप दर्ज किया गया था.

विशेषज्ञों के अनुसार उथले भूकंप आमतौर पर ज्यादा खतरनाक माने जाते हैं. इसकी वजह यह है कि भूकंपीय तरंगों को सतह तक पहुंचने से पहले कम दूरी तय करनी पड़ती है. इससे जमीन ज्यादा हिलती है और नुकसान तथा हताहत होने की आशंका बढ़ जाती है.