हिमालयी और मध्य एशिया क्षेत्र में रविवार तड़के भूकंपों की श्रृंखला ने एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ा दी. तिब्बत और अफगानिस्तान में कुछ ही घंटों के अंतराल में आए झटकों से धरती हिलती महसूस की गई. हालांकि किसी तरह के नुकसान की खबर सामने नहीं आई है, लेकिन भूकंपीय गतिविधि के कारण सीमावर्ती इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है.
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने इन भूकंपों की पुष्टि करते हुए बताया कि सभी झटके मध्यम तीव्रता के थे. तिब्बत और अफगानिस्तान दोनों ही क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील माने जाते हैं. ऐसे में लगातार दर्ज हो रहे झटके इस पूरे भू-भाग की सक्रियता को दर्शाते हैं, जिसका असर आसपास के देशों तक महसूस किया जा सकता है.
एनसीएस के अनुसार रविवार सुबह तिब्बत में 3.7 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया. इसका केंद्र 10 किलोमीटर की गहराई पर था, जिससे इसे उथला भूकंप माना गया. इससे पहले शनिवार को भी तिब्बत में 3.0 तीव्रता का एक अन्य भूकंप रिकॉर्ड किया गया था. दोनों ही झटकों से किसी तरह के नुकसान या घायलों की सूचना नहीं मिली है.
इसी दौरान अफगानिस्तान में रविवार तड़के 4.1 तीव्रता का भूकंप आया. एनसीएस के मुताबिक इसका केंद्र 112 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था. गहराई अधिक होने के कारण इसका असर सीमित रहा और किसी तरह की तबाही की खबर सामने नहीं आई. फिर भी स्थानीय प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है.
इन भूकंपों के बाद भारत में झटके महसूस होने को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. अधिकारियों के अनुसार कहीं से भी हल्के कंपन या नुकसान की सूचना नहीं मिली. हालांकि हिमालयी क्षेत्र की भूकंपीय संवेदनशीलता को देखते हुए विशेषज्ञ सतर्क रहने की सलाह देते हैं और स्थिति पर लगातार निगरानी की जा रही है.
तिब्बती पठार और अफगानिस्तान दोनों ही सक्रिय विवर्तनिक प्लेटों के क्षेत्र में आते हैं. यहां सतही और गहरे दोनों प्रकार के भूकंप आते रहते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार उथले भूकंप ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं, लेकिन फिलहाल दर्ज किए गए झटके कम तीव्रता के रहे, जिससे बड़े खतरे की स्थिति नहीं बनी.