केंद्रीय कैबिनेट ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम यानी NSAP को अगले पांच साल तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक के लिए इस योजना के तहत 53,428 करोड़ रुपये के खर्च को मंजूरी दी गई है.
सरकार ने इसके साथ ही दिव्यांग पेंशन के नियमों में भी बड़ा बदलाव किया है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि देश के सामाजिक सुरक्षा दायरे को 2031 तक बढ़ाया गया है.
दिव्यांग पेंशन के लिए अब पहले से कम दिव्यांगता प्रतिशत की जरूरत होगी. मौजूदा नियमों में 80 फीसदी दिव्यांगता की सीमा थी, जिसे घटाकर 40 फीसदी कर दिया गया है. यानी 40 फीसदी या उससे अधिक बेंचमार्क दिव्यांगता वाले लोग भी इस पेंशन के पात्र हो सकेंगे. इसके अलावा दिव्यांग पेंशन के लिए न्यूनतम उम्र की शर्त भी हटा दी गई है. इसका मतलब है कि पात्रता जन्म से ही लागू हो सकती है.
सरकार के मुताबिक, दिव्यांग पेंशन के तहत 0 से 79 वर्ष की उम्र के लाभार्थियों को हर महीने 375 रुपये की सहायता मिलेगी. वहीं, 80 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लाभार्थियों को 625 रुपये प्रति माह दिए जाएंगे. दिव्यांग पेंशन के लिए नए पात्रता नियम, लाभार्थियों की संख्या और सहायता राशि से जुड़ी विस्तृत गाइडलाइन तीन महीने के भीतर जारी करके लागू की जाएगी.
सरकार के अनुसार, देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में करीब 3.20 करोड़ लाभार्थी इस सामाजिक सहायता कार्यक्रम के दायरे में आएंगे. पुरानी उम्र की पेंशन, विधवा पेंशन और राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना को मौजूदा स्वरूप में ही जारी रखने का फैसला किया गया है. इनमें कोई बदलाव नहीं किया गया है.
कैबिनेट ने NSAP और इसकी अलग-अलग योजनाओं के नाम बदलने को भी मंजूरी दी है. अब National Social Assistance Programme को प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना के नाम से जाना जाएगा.
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना का नाम प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना होगा. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना को प्रधानमंत्री विधवा पेंशन योजना और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन योजना को प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना नाम दिया जाएगा. इसी तरह राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना का नाम प्रधानमंत्री परिवार लाभ योजना किया जाएगा.
राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम की शुरुआत 15 अगस्त 1995 को हुई थी. इसका उद्देश्य गरीब परिवारों को सामाजिक सहायता उपलब्ध कराना है. यह कार्यक्रम संविधान के अनुच्छेद 41 में राज्य के नीति निदेशक तत्वों के तहत सामाजिक सहायता से जुड़ी जिम्मेदारी के अनुरूप शुरू किया गया था.
NSAP का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती है. सरकार के अनुसार, इससे देशभर में सामाजिक सहायता के स्तर में एकरूपता बनाए रखने में मदद मिलती है. दिव्यांग पेंशन के नियमों में किए गए बदलाव दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुरूप हैं. इस कानून में बेंचमार्क दिव्यांगता के लिए 40 फीसदी की सीमा निर्धारित की गई है.