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राज्यसभा में NDA का जलवा, बीजेपी की हुई बड़ी जीत से विपक्ष की बढ़ी चिंता; जानें राज्यसभा चुनाव की 37 सीटों का डिटेल

राज्यसभा चुनाव में एनडीए ने 37 में से 22 सीटें जीतकर बहुमत हासिल कर लिया है. इससे संसद में सरकार की ताकत बढ़ी है और अहम बिल पास कराना आसान होगा.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
राज्यसभा में NDA का जलवा, बीजेपी की हुई बड़ी जीत से विपक्ष की बढ़ी चिंता; जानें राज्यसभा चुनाव की 37 सीटों का डिटेल
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: NDA ने 37 राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनावों में जबरदस्त सफलता हासिल की है. जिन ग्यारह सीटों के लिए कल वोटिंग हुई थी, उनमें से NDA ने नौ सीटें जीतीं. गठबंधन ने बिहार और ओडिशा में एक-एक अतिरिक्त सीट जीती, जबकि हरियाणा में कड़े मुकाबले के बाद एक सीट हासिल की.

26 सीटों पर चुनाव निर्विरोध हुए, जिनमें से NDA ने 13 सीटें जीतीं. इस तरह कुल 37 सीटों में से 22 सीटें जीतकर NDA ने एक बड़ी जीत हासिल की है. विपक्ष को 15 सीटें मिलीं. कांग्रेस पार्टी के लिए राहत की बात यह है कि राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद उसके पास ही रहेगा.

NDA ने किस राज्य में कितनी सीटें जीतीं?

NDA ने महाराष्ट्र की सात में से छह सीटें, बिहार की सभी पांच सीटें, असम की सभी तीन सीटें, ओडिशा की चार में से तीन सीटें, तमिलनाडु की पांच में से दो सीटें, पश्चिम बंगाल की पांच में से एक सीट और हरियाणा व छत्तीसगढ़ की दो में से एक सीट जीती. मनोनीत सांसद रंजन गोगोई का कार्यकाल भी अब खत्म होने वाला है. इस खाली सीट को भरने के लिए जल्द ही एक नया नामांकन किया जाएगा और वह सीट भी NDA की सीटों की संख्या में जुड़ जाएगी.

क्या पड़ेगा इसका असर?

इस नतीजे का सीधा असर राज्यसभा में देखने को मिलेगा. NDA ने अब उच्च सदन में स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है. 103 सीटों के साथ, BJP पहले ही सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर अपनी मजबूत जगह बना चुकी थी. इन ताजा नतीजों के बाद पार्टी की स्थिति और भी मजबूत होने वाली है. BJP और उसके सहयोगी दलों की कुल सीटों की संख्या बढ़कर 135 से ज्यादा हो गई है. यह एक ऐसा आंकड़ा है जो अहम विधायी बिलों को पास करवाने में बेहद मददगार साबित होने की उम्मीद है.

महिला आरक्षण बिल को लेकर क्या है रणनीति?

ऐसा ही एक अहम बिल लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रस्ताव करता है. हालांकि 'नारी वंदन अधिनियम' पहले ही कानून बन चुका है लेकिन सरकार इसे बिना किसी देरी के लागू करना चाहती है. खास तौर पर 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए. इसी मकसद से मौजूदा सत्र में ही एक 'संवैधानिक संशोधन बिल' पेश करने पर अभी चर्चा चल रही है.

क्या है सरकार का प्लान?

सरकार यह पक्का करना चाहती है कि जनगणना और परिसीमन की प्रक्रियाओं की वजह से इस कदम को लागू करने में कोई देरी न हो. नतीजतन इसे मुमकिन बनाने के लिए अलग-अलग विकल्पों पर विचार किया जा रहा है. हालांकि राज्यसभा की नई संरचना मॉनसून सत्र से ही लागू होगी, क्योंकि नए सदस्यों का कार्यकाल अप्रैल के बाद ही शुरू होना है.

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