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जमानत मिली लेकिन बाहर नहीं आएंगे केजरीवाल, समझिए अब कहां फंस गया पेच?

सुप्रीम कोर्ट में ED ने अरविंद केजरीवाल की याचिका पर दलील दी कि उनके पास पर्याप्त ऐसे सबूत हैं, जो इशारा करते हैं कि अरविंद केजरीवाल ने 100 करोड़ रुपये मांगे थे. इन पैसों को गोवा में चुनाव प्रचार के दौरान खर्च किया गया. ईडी ने अरविंद केजरीवाल को आबकारी नीति तैयार करने का मुख्य साजिशकर्ता भी बताया है.

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India Daily Live

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को दिल्ली आबकारी नीति केस में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 के तहत दर्ज मामले में अंतरिम जमानत दे दी है. अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली एक याचिका सीनियर बेंच को ट्रांसफर कर दी है. जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच ने अरविंद केजरीवाल की याचिका को एक सीनियर बेंच के पास भेजा है.

जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच ने इस केस को सीनियर बेंच के पास इसलिए भेजा है, जिससे यह जांच हो सके कि PMLA की धारा 19 के तहत, गिरफ्तारी की जरूरत या अनिवार्यता को लेकर विसंगतियां साफ हो सकें. अरविंद केजरीवाल को भले ही जमानत मिल गई है लेकिन वे जेल में ही रहेंगे. उन्हें ईडी के केस में जमानत मिली है लेकिन वे सीबीआई की हिरासत में हैं. ऐसे में अभी उन्हें रिहाई के लिए लंबा इंतजार करना होगा.
 
जस्टिस खन्ना ने बेंच का फैसला पढ़ते हुए कहा, 'गिरफ्तारी PMLA की धारा 19 के तहत विश्वास करने की वजहों के पैमाने को पूरा करती है. बेंच ने अब तक उनकी कैद को देखते हुए उन्हें जमानत देने का फैसला किया. बेंच ने साफ कहा है कि अंतरिम जमानत के सवाल को सीनियर बेंच संशोधित कर सकती है.

क्या है सीएम केजरीवाल की गिरफ्तारी की टाइमलाइन?

जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच ने 17 मई 2024 को केस पर फैसला सुरक्षित रखा था. आज इस फैसले को बेंच ने सुनाया है. दिल्ली हाई कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को जमानत के खिलाफ अंतरिम राहत नहीं दी थी, उन्हें 21 मार्च को गिरफ्तार किया था. उन्हें 10 मई को जमानत मिली. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें चुनाव प्रचार के लिए जमानत दी थी. यह अवधि 2 जून को खत्म हो गई थी, उन्हें वापस तिहाड़ जेल जाना पड़ा था. 

दिल्ली के मुख्यमंत्री ने ईडी की गिरफ्तारी को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. 9 अप्रैल को हाई कोर्ट ने सीएम केजरीवाल की जमानत याचिका ही खारिज कर दी थी. वे आनन-फानन में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे. 15 अप्रैल को उनकी याचिका पर कोर्ट ने दोनों पक्षों को नोटिस जारी किया. 


क्या कह रहे हैं केजरीवाल की कोर्ट में दलील?

इस केस की सुनवाई के दौरान अरविंद केजरीवाल की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी ने दलीलें पेश कीं. उन्होंने अरविंद केजीवाल की गिरफ्तारी को चुनौती दी. उन्होंने गिरफ्तारी के समय, ईडी की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल खड़े किए. अभिषेक मनु सिंघवी की दलीलों के बाद ईडी की ओर से पेश ASG राजू से 5 सवाल पूछे और जवाब देने को कहा.

प्रीम कोर्ट में ED ने अरविंद केजरीवाल की याचिका पर दलील दी कि उनके पास पर्याप्त ऐसे सबूत हैं, जो इशारा करते हैं कि अरविंद केजरीवाल ने 100 करोड़ रुपये मांगे थे. इन पैसों को गोवा में चुनाव प्रचार के दौरान खर्च किए गए. ईडी ने अरविंद केजरीवाल को आबकारी नीति तैयार करने का मुख्य साजिशकर्ता भी बताया है.

क्या है केजरीवाल की आपत्तियां?

अरविंद केजीरवाल के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि गिरफ्तारी का समय संदिग्ध है. ECIR अगस्त 2022 में दर्ज की गई लेकिन केजरीवाल को डेढ़ साल बाद चुनाव से ठीक पहले गिरफ्तार किया गया. कोर्ट ने राहत दी और उन्हें अस्थाई रूप से चुनाव प्रचार करने का मौका मिला. 2 जून को उन्हें सरेंडर करना पड़ा.  20 जून को सीएम केजरीवाल को राउज एवेन्यू कोर्ट ने जमानत दी, जिस पर हाई कोर्ट ने स्टे लगा दिया. ईडी कोर्ट में अपराध कितनी आय हुई, उसके दस्तावेज कहां है, यह देने में असफल रहा. 

25 जून को हाई कोर्ट ने जमानत के फैसले पर स्टे लगा दिया. जज ने कहा कि ईडी की दस्तावेजों को बिना देखे ही जमानत का फैसला दिया गया. यह गलत है. उसी दिन CBI ने भी केजरीवाल को भ्रष्टाचार से जुड़े केस में गिरफ्तार कर लिया. अब केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के खिलाफ भी केस दर्ज है. केजरीवाल ने अपनी गिरफ्तारी को भी चुनौती दी है. उनसे जुड़े दो मामलों को 17 जुलाई को सुनवाई होगी.