गुजरात के डांग जिले ने कर दिया कमाल, हासिल की ये बेहद खास उपलब्धि
गुजरात के डांग जिले ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है जिसकी आज के परिवेश में शायद सबसे ज्यादा जरूरत है. डांग जिला गुजरात का पूरी तरह से प्राकृतिक खेती करने वाला जिला घोषित किया गया है. प्राकृतिक खेती से यहां के किसानों की आय में कई गुना वृद्धि हुई है.
Gujarat News: भारतवासियों के लिए एक बेहद शानदार खबर है या ये कहें कि सबसे शानदार खबर है. मिलावटी खाने के इस दौर में भारत ने पूर्ण रूप से प्राकृतिक खेती करने की दिशा में कदम बढ़ा दिये हैं. गुजरात का वन्य क्षेत्र डांग पूर्ण रूप से प्राकृतिक खेती करने वाला जिला घोषित किया गया है. इस जिले ने 'हमारा डांग, प्राकृतिक डांग' अभियान के तहत इस उपलब्धि को हासिल किया है.
मोदी सरकार की पहल का असर
डांग द्वारा इस उपलब्धि को हासिल करने का श्रेय कुछ हद तक मोदी सरकार को भी जाता है जिसने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कई कठोर फैसले लिये हैं. हालिया बजट में केंद्र ने घोषणा की थी कि प्राकृतिक रूप से खेती करने की प्रक्रिया में देशभर के 1 करोड़ किसानों को जोड़ा जाएगा.
गुजरात में बढ़ रहा प्राकृतिक खेती का रकबा
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात में प्राकृतिक खेती को अपनाने की दिशा में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. डांक को प्राकृतिक खेती वाला जिला घोषित करने से यहां खेती करने वाले आदिवासी युवाओं के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा है.
प्राकृतिक खेती से किसान की आय में हुआ 700 प्रतिशत का इजाफा
प्रेस रिलीज के मुताबिक, किसान राजूभाई बुधाभाई सहरे ने ड्रिप सिंचाई की तकनीक अपनाकर साल 2023 में मात्र 2 हेक्टेयर जमीन से 3 लाख रुपए का मुनाफा कमाया.
प्रेस रिलीज के मुताबिक, '40 वर्षीय राजूभाई बुधाभाई ने हॉर्टिकल्चर (बागवानी) विभाग से हॉर्टिकल्चर (बागवानी) का प्रशिक्षण लिया. 2021 में उन्होंने 2 हेक्टेयर में करेला लगाकर 55,000 रुपए कमाए, जिसमें से उन्हें 40,000 रुपए का लाभ हुआ. 2023-24 तक उन्होंने मल्चिंग और ड्रिप सिंचाई तकनीकों का उपयोग कर मिर्च, करेला, टमाटर, ब्रोकली से 4 लाख 40 हजार रुपए की कमाई की. पिछले तीन सालों में उनकी आय में 700 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.'
लगाए 25,000 स्ट्रॉबेरी के पौधे
राजूभाई ने कहा कि उन्होंने कई तरह की फसलें कीं और इस साल 25,000 स्ट्रॉबेरी के पौधे लगाए. राजूभाई ने कहा कि हम प्राकृतिक तरीकों से मौसम के अनुसार करेला, टमाटर, गैलो और धान जैसी फसलें लगाते हैं. राजूभाई ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार के समर्थन का धन्यवाद दिया. उन्होंने कहा कि हमें बागवानी विभाग से सब्सिडी मिलती है और ट्रेनिंग भी.
प्राकृतिक खेती का रुख कर रहे किसान
प्रेस रिलीज के अनुसार, गुजरात सरकार ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को ट्रेनिंग और सपोर्ट भी किया है. अब राज्य के कई किसान प्राकृतिक खेती की ओर रुख कर रहे हैं. राज्य सरकार ने प्राकृतिक खेती में शामिल किसानों को 2021 से 2023-24 तक 1603 लाख रुपए की सहायता राशि आवंटित की है.