'CEC ने झूठ का पुलिंदा बनाया, हमारे साथ अभद्र व्यवहार किया', SIR पर बैठक के बाद ममता बनर्जी का बड़ा आरोप
बैठक से बाहर निकलते हुए ममता बनर्जी ने पत्रकारों से कहा कि बंगाल में आम तौर पर होने वाली मामूली वर्तनी की गलतियों और नाम में बदलाव के कारण मतदाताओं के दावे रद्द किये जा रहे हैं.
सोमवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से 90 मिनट मुलाकात के बाद चुनाव आयोग पर जोरदार हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम काटे गए और कहा कि चुनाव आयोग बीजेपी के इशारे पर काम कर रहा है.
मतदाताओं के दावे किए जा रहे रद्द
बैठक से बाहर निकलते हुए ममता बनर्जी ने पत्रकारों से कहा कि बंगाल में आम तौर पर होने वाली मामूली वर्तनी की गलतियों और नाम में बदलाव के कारण मतदाताओं के दावे रद्द किये जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग भाजपा का सूचना एवं संचार विभाग है क्या आप इसे लोकतंत्र मानते हैं?
58 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए
ममता बनर्जी ने कहा, 'बंगाल में लोग अपने उपनाम बदलते हैं, अपनी उपाधियां बदलते हैं. उपाधियों में बदलाव के कारण नाम काटे जा रहे हैं.' उन्होंने आगे बताया कि ऐसे अंतरों को अंसगतता बताकर मतदाता सूची ने नाम काटे जा रे हैं. उन्होंने दावा किया कि बिना सुनवाई का मौका दिए ही 58 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए. सीएम ममता ने आरोप लगाया कि इस अभियान के दौरान बूथ स्तर के अधिकारियों (BLO) पर दबाव डाला जा रहा है.
बनर्जी ने आरोप लगाया कि अनुसूचित जाति और अल्पसंख्यक समुदाय समान रूप से प्रभावित हो रहे हैं. उन्होंने पूछा कि अनुसूचित जाति और अल्पसंख्यकों को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है? क्या वे इंसान नहीं है.
सीईसी ने किया टीएमसी के दावों का खंडन
बैठक से परिचित सूत्रों ने बताया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने तृणमूल के आरोपों का खंडन किया और जोर देकर कहा कि कानून का शासन कायम रहेगा. सूत्रों की मानें तो सीईसी ने टीएमसी के प्रतिनिधियों से कहा कि कानून को अपने हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति के साथ कानून के प्रावधानों और चुनाव आयोग को दी हुई शक्तियों के तहत सख्ती से निपटा जाएगा. सीईसी ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट किया कि SIR से संबंधित कार्य कर रहे अधिकारियों पर किसी भी प्रकार का दबाव, बाधा या हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए.