नई दिल्ली: प्रियंका गांधी सहित कांग्रेस की छह महिला सांसदों के एक ग्रुप ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक कड़ा पत्र लिखकर उन पर 'झूठे और मानहानिकारक आरोप' लगाने का आरोप लगाया है. यह विवाद तब शुरू हुआ जब बिरला ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को सदन में न आने की सलाह दी थी क्योंकि उन्हें डर था कि कांग्रेस सांसद पीएम की सीट के पास कोई 'अनुचित घटना' कर सकते हैं.
बिरला को लिखे तीन पन्नों के पत्र में, कांग्रेस सांसद एस. जोतिमणि और अन्य महिला सांसदों ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया और इसे सरकार द्वारा विपक्ष के नेता को बोलने की अनुमति न देने के मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया. पत्र में कहा गया है, 'हम यह पत्र गहरी पीड़ा और संवैधानिक जिम्मेदारी की भावना के साथ लिख रहे हैं. यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि आप लोकसभा के माननीय स्पीकर के रूप में सत्ताधारी पार्टी के दबाव में विपक्ष से संबंधित महिला सांसदों के खिलाफ झूठे निराधार और मानहानिकारक आरोप लगाने के लिए मजबूर हुए हैं.'
इसमें आगे कहा गया कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान स्थापित संसदीय परंपरा के अनुसार सत्ताधारी पार्टी और विपक्ष दोनों को बोलने की अनुमति दी जाती है, जिसके बाद प्रधानमंत्री जवाब देते हैं. फिर भी पिछले लगातार चार दिनों से विपक्ष के नेता राहुल गांधी को लोकसभा में जानबूझकर यह अवसर नहीं दिया गया है. यह अभूतपूर्व और अक्षम्य है.
पत्र में आगे दावा किया गया कि INDIA गठबंधन के आठ सांसदों को सरकार के इशारे पर निलंबित कर दिया गया, जबकि एक भाजपा सांसद को बिना किसी परिणाम के पूर्व प्रधानमंत्रियों के बारे में अश्लील और आपत्तिजनक टिप्पणी करने की अनुमति दी गई. कांग्रेस सांसदों ने स्पीकर पर स्वतंत्र अधिकार का प्रयोग करने के बजाय सरकार के निर्देशों पर काम करने का भी आरोप लगाया.
Women Parliamentarians of the Congress Party write a letter to Lok Sabha Om Birla regarding "baseless allegations against women Members of Parliament and the denial of the Opposition's Parliamentary Rights"
— ANI (@ANI) February 9, 2026
"We write this letter with deep anguish and a strong sense of… pic.twitter.com/gwdx2uNkyt
बिरला ने कहा, 'जब प्रधानमंत्री को सदन में राष्ट्रपति के अभिभाषण का जवाब देना था, तो मुझे जानकारी मिली कि कई कांग्रेस सांसद प्रधानमंत्री की कुर्सी के पास कोई अनुचित घटना कर सकते थे... अगर ऐसी कोई घटना होती, तो यह देश की लोकतांत्रिक परंपराओं को तार-तार कर देती. इसे रोकने के लिए मैंने प्रधानमंत्री से सदन में न आने का अनुरोध किया.'