जंतर-मंतर पर लंबे आंदोलन के बाद समझौते के आधार पर प्रदर्शन खत्म करने वाला कॉकरोच जनता पार्टी अब एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में है. संगठन का आरोप है कि केंद्र ने आंदोलन खत्म कराने के दौरान किए गए वादों पर अब तक पर्याप्त कार्रवाई नहीं की है.
कॉकरोच जनता पार्टी ने रविवार को केंद्र सरकार से आंदोलन खत्म कराने के दौरान किए गए आश्वासनों को पूरा करने की मांग की. संगठन का कहना है कि युवाओं से किए गए वादों को केवल आंदोलन समाप्त कराने का जरिया नहीं बनाया जा सकता. पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार ने शांतिपूर्ण आंदोलन खत्म कराने के लिए प्रतिबद्धताएं जताईं, लेकिन अब उन्हीं वादों से पीछे हटने की कोशिश हो रही है. संगठन ने इसे युवाओं के साथ विश्वासघात बताया है. उसका कहना है कि सरकार को अपने वादों को केवल शब्दों में नहीं, बल्कि जमीन पर भी लागू करना चाहिए. इस मामले को लेकर संगठन ने केंद्र से जल्द स्पष्ट कदम उठाने की मांग की है.
संगठन के मुताबिक, छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने के मुद्दे पर अदालत की ओर से बार-बार जानकारी मांगी गई है, लेकिन सरकार ने अभी तक संबंधित सूची उपलब्ध नहीं कराई है. CJP का दावा है कि आंदोलन खत्म करने के बाद भी सरकार की ओर से इस मुद्दे पर टीम से कोई ठोस संपर्क नहीं किया गया. संगठन के पदाधिकारियों ने आशंका जताई है कि जिन शर्तों के आधार पर प्रदर्शन वापस लिया गया था, उन्हें अब टालने या अलग तरीके से समझाने की कोशिश हो सकती है. CJP ने कहा कि ऐसा हुआ तो इसे युवाओं के भरोसे के साथ गंभीर धोखा माना जाएगा.
कॉकरोच जनता पार्टी ने संकेत दिया है कि वह अपने अगले कदम पर 24 अगस्त को फैसला करेगी. संगठन ने छात्रों, युवाओं, समर्थकों और अपने स्वयंसेवकों से तैयार रहने की अपील की है. इससे एक बार फिर आंदोलन शुरू होने की संभावना बढ़ गई है. संगठन का कहना है कि सरकार की ओर से अब तक ऐसा कोई प्रतिनिधिमंडल या अधिकारी टीम के संपर्क में नहीं आया है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि किए गए वादों पर क्या कार्रवाई हुई है. इनमें NEET से जुड़े मामलों में आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने की मांग भी शामिल थी. CJP ने कहा कि आंदोलन के दौरान तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पूरी हुई, लेकिन बाकी वादे पूरे होने तक वह शांत नहीं बैठेगा.
कॉकरोच जनता पार्टी ने 25 जुलाई को एक महीने से ज्यादा समय तक चले अपने आंदोलन को समाप्त करने की घोषणा की थी. संगठन के अनुसार, उस समय सरकार ने उसकी तीन प्रमुख मांगों को स्वीकार किया था. इनमें NEET पेपर लीक से जुड़े मामलों में आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को अधिकतम संभव मुआवजा देना, केंद्र और NDA शासित राज्यों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेना तथा भविष्य में आंदोलन से जुड़े लोगों पर कार्रवाई नहीं करना शामिल था. इसके अलावा CJP के पांच सूत्रीय परीक्षा सुधार प्रस्ताव पर सरकार द्वारा विचार करने और आगे संगठन के साथ चर्चा करने की बात कही गई थी. अब संगठन इन्हीं वादों के क्रियान्वयन को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ा रहा है.