CJP की कोर कमेटी पर घमासान, दीपके के घर के बाहर क्यों धरने पर बैठे आंदोलन से जुड़े युवा?
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में सीजेपी की कोर कमेटी को लेकर विवाद गहरा गया है. आंदोलन से जुड़े युवाओं ने परिवारवाद का आरोप लगाकर सभी कोऑर्डिनेटर्स को प्रतिनिधित्व देने की मांग की है.
नई दिल्ली: छत्रपति संभाजीनगर में कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी की प्रस्तावित कोर कमेटी को लेकर संगठन के भीतर ही असंतोष सामने आया है. अभिजीत दीपके के घर के बाहर पहुंचे युवाओं ने नेतृत्व पर पक्षपात और परिवारवाद के आरोप लगाए. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जंतर-मंतर छात्र आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में युवाओं ने कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी संभाली थी, लेकिन कोर कमेटी की बैठक में सभी को जगह नहीं दी गई. इसी को लेकर युवाओं ने विरोध शुरू कर दिया है.
प्रदर्शन कर रहे युवाओं का दावा है कि आंदोलन से शुरुआत से जुड़े कई कार्यकर्ताओं को बैठक से दूर रखा गया. उनका आरोप है कि अभिजीत दीपके के करीबी माने जाने वाले लोगों को प्राथमिकता दी गई. युवाओं का कहना है कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति या समूह का नहीं था, बल्कि देशभर के छात्रों और युवाओं की आवाज से खड़ा हुआ था. इसलिए संगठनात्मक फैसलों में भी आंदोलन से जुड़े सभी प्रमुख कार्यकर्ताओं की भागीदारी होनी चाहिए.
करीब 450 कोऑर्डिनेटर्स का दावा
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक जंतर-मंतर आंदोलन से करीब 450 लोग अलग-अलग स्तर पर कोऑर्डिनेटर के तौर पर जुड़े थे. उनका कहना है कि इन लोगों ने आंदोलन को आगे बढ़ाने में समय और मेहनत लगाई, लेकिन कोर कमेटी की बैठक में उन्हें प्रतिनिधित्व नहीं मिला. युवाओं ने पार्टी प्रवक्ता आशुतोष रांका से भी देर रात तक बातचीत की, लेकिन उनका आरोप है कि उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला. इसके बाद विरोध का फैसला लिया गया.
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अनशन की दी चेतावनी
सीजेपी कार्यकर्ता मनीष ब्रह्मभट्ट ने कहा कि उनका विरोध किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि फैसले लेने की प्रक्रिया को लेकर है. उनका कहना है कि यदि संगठन लोकतंत्र की बात करता है तो उसकी आंतरिक व्यवस्था में भी पारदर्शिता दिखनी चाहिए. ब्रह्मभट्ट के अनुसार, आंदोलन से जुड़े लोगों को बिना भेदभाव के अपनी बात रखने और निर्णय प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि मांग पूरी होने तक वे धरने पर बने रहेंगे.
परिवारवाद के खिलाफ आवाज
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि आंदोलन की टीम में रिश्तेदारों और करीबी लोगों को जगह देने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी. उनका कहना है कि शुरुआत से आंदोलन में भाई-भतीजावाद और पक्षपात की कोई जगह नहीं रही. मनीष ब्रह्मभट्ट ने कहा कि आंदोलन के प्रमुख चेहरों और राज्यों से जुड़े प्रतिनिधियों से सलाह लेकर आगे की रणनीति तैयार की जानी चाहिए. उनके मुताबिक, सभी स्वयंसेवकों को साथ लेकर चलना ही आंदोलन की विश्वसनीयता बनाए रख सकता है.
पारदर्शी टीम बनाने की मांग
युवाओं ने साफ किया है कि वे तब तक अपना विरोध जारी रखेंगे, जब तक सभी राज्यों से जुड़े प्रतिनिधियों और आंदोलन के स्वयंसेवकों को उचित जगह देने पर सहमति नहीं बनती. उनका कहना है कि टीम का गठन खुले और लोकतांत्रिक तरीके से होना चाहिए. प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, अभी जवाबदेही तय करना जरूरी है, ताकि भविष्य में आंदोलन से जुड़े फैसलों को लेकर किसी तरह का विवाद न खड़ा हो. फिलहाल कोर कमेटी को लेकर यह असंतोष आगे किस रूप में बढ़ता है, इस पर नजर रहेगी.